दिनेश कुमार पांडेय /रफ्तार ब्यूरो /बोकारो
सोलह मात्रा का जटिल तीनताल हो या दस मात्रा की कसौटी वाला झपताल, जब नन्हे उस्तादों ने तबले पर हाथ आजमाया, तो देखने वाले बस देखते ही रह गए। अवसर था दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो की प्राइमरी इकाई के सांस्कृतिक उत्सव 'धरोहर' का। मंगलवार को अंतर-सदन समूह तबलावादन के साथ इस संगीतमय उत्सव की शुरुआत हुई। इसमें दूसरी कक्षा से पांचवीं तक के सभी छह सदनों के बाल संगीत-साधकों ने अद्वितीय लयकारी और उत्साह का प्रदर्शन किया।
रंग-बिरंगे, आकर्षक व भव्य पारंपरिक परिधानों में सजे-संवरे तबला के नन्हे उस्तादों की छोटी-छोटी नाजुक उंगलियों से तीन ताल और झपताल के क्लिष्ट बोल ऐसे प्रस्फुटित हो रहे थे, मानो ताल और लय के किसी झरने से अमूल्य स्वर-बूंदें बरस रही हों। नन्हे वादकों की यह प्रस्तुति उनके कठिन परिश्रम, अनवरत साधना और शास्त्रीय लयबद्धता की उत्कृष्ट मिसाल पेश कर रही थी। बोलपढ़ंत, आपसी सामंजस्य, लयकारी और निकास सहित विभिन्न मापदंडों के आधार पर इस स्पर्धा में जमुना सदन ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि गंगा और रावी सदन की टीमों ने संयुक्त रूप से उपविजेता बनने का गौरव पाया। वहीं, चेनाब हाउस की टीम तृतीय स्थान पर रही।
इसके पूर्व, समारोह का औपचारिक शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार को फल-उपहार भेंटकर किए गए आत्मीय स्वागत एवं पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्राचार्य ने बच्चों के प्रदर्शन और उनके आत्मविश्वास की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए अपनी प्रतिभा को इसी प्रकार निरंतर परिश्रम से निखारने की प्रेरणा दी। उन्होंने संगीत के क्षेत्र में छात्राओं की और अधिक भागीदारी पर बल देते हुए कहा कि आज कला और संगीत के क्षेत्र में करियर की असीम संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को सफलता का मूलमंत्र देते हुए उन्होंने अनुशासन को सपनों और सफलता के बीच का सबसे मजबूत सेतु बताया तथा स्वयं पर अटूट विश्वास रखते हुए बगैर दूसरों से तुलना किए अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उक्त प्रतियोगिता की निर्णायक मंडली में सीनियर विंग के वरिष्ठ संगीत शिक्षक भास्कर रंजन डे, विक्की आनंद पाठक एवं मृत्युंजॉय भट्टाचार्य शामिल रहे। प्रतियोगिता का संचालन छात्र शिवम श्री एवं अवनी सिया ने किया। इस उत्सव की कड़ी में बुधवार को अंतर-सदन समूहगान प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।