पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supply) पर पड़ रहे असर के बीच भारत में घरेलू रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की है।
सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) की वेबसाइट के अनुसार 14.2 किलोग्राम का गैर-सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब दिल्ली में 913 रुपये का हो गया है, जो पहले 853 रुपये था। पिछले 11 महीनों में यह दूसरी बार कीमत बढ़ाई गई है। इससे पहले अप्रैल 2025 में भी एलपीजी की कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।
एलपीजी कीमत बढ़ने का असर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana) के लाभार्थियों पर भी पड़ेगा। हालांकि इस योजना के तहत लाभार्थियों को प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी (Subsidy) मिलती है। नई कीमत के बाद उन्हें 14.2 किलोग्राम सिलेंडर के लिए अब 613 रुपये चुकाने होंगे। यह नई दरें 7 मार्च से लागू कर दी गई हैं।
घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी (Commercial LPG) सिलेंडरों की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 114.5 रुपये बढ़कर 1,883 रुपये हो गई है।
बताया जा रहा है कि बढ़ती कीमतों और संभावित आपूर्ति संकट (Supply Disruption) को देखते हुए गैस वितरकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग (Black Marketing) रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने को कहा है। इसके तहत घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया है, जो पहले 15 दिन था।
ऊर्जा आपूर्ति (Energy Supply) को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने देश की तेल रिफाइनरियों (Oil Refineries) को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है ताकि किसी संभावित वैश्विक आपूर्ति संकट की स्थिति में घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बनी रहे।
दरअसल पश्चिम एशिया में अमेरिका (USA) और इजरायल (Israel) द्वारा ईरान (Iran) पर किए गए हमलों के बाद पैदा हुए सैन्य तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल आया है।
ईरान और ओमान (Oman) के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में से एक माना जाता है।
युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिकी कच्चा तेल करीब 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) लगभग 92.69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। वहीं एशियाई बाजार में एलएनजी (LNG) की स्पॉट कीमत भी बढ़कर करीब 25.40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (MMBtu) हो गई है, जो पिछले तीन साल का उच्चतम स्तर है।
रिपोर्ट्स के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से करीब 3,000 कार्गो जहाज (Cargo Ships) और टैंकर विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं, जिनमें लगभग 300 तेल और गैस टैंकर शामिल हैं। भारत के कुल प्राकृतिक गैस आयात (Natural Gas Import) का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा भी इसी रास्ते से आता है।
भारत में एलपीजी की खपत (LPG Consumption) लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024-25 में देश में लगभग 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत हुई, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन घरेलू उत्पादन था, जबकि बाकी आयात (Import) करना पड़ा। आयातित एलपीजी का लगभग 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब (Saudi Arabia) और खाड़ी देशों (Gulf Countries) से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है।