रांची/डेस्क: आज की युवा पीढ़ी में टैटू बनवाने का चलन बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। कुछ लोग इसे फैशन मानते हैं तो कुछ इसे अपनी आस्था और भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम। कई श्रद्धालु अपने शरीर पर भगवान के नाम धार्मिक प्रतीक जैसे ॐ महादेव त्रिशूल या राम जैसे टैटू बनवाते हैं। लेकिन क्या यह वास्तव में सही है?

हाल ही में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज  का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें उन्होंने इस विषय पर गहराई से मार्गदर्शन दिया। इस वीडियो में महाराज जी ने एक व्यक्ति के हाथ पर बने महादेव नाम और त्रिशूल के टैटू को देखकर उसे परामर्श दिया कि ऐसे टैटू शरीर पर न बनवाएं।

प्रेमानंद महाराज ने क्या कहा? 
महाराज ने कहा उल्टे हाथ में महादेव का नाम लिखा है। इस हाथ का प्रयोग हम शौच आदि कार्यों में करते हैं। ऐसे में भगवान के नाम का अनजाने में अपमान हो सकता है। यह एक प्रकार से अपराध है।

उन्होंने आगे सुझाव दिया कि ऐसे टैटू को फूल या अन्य गैर-धार्मिक चिन्ह में परिवर्तित कर देना चाहिए ताकि कोई अपवित्रता न हो। प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी श्रद्धालु को भगवान का नाम शरीर पर स्थायी रूप से अंकित नहीं कराना चाहिए क्योंकि यह भक्ति के सही स्वरूप के विपरीत है।

प्रेमानंद महाराज अपने उपदेशों और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए प्रसिद्ध हैं। हाल ही में भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा भी उनसे मिलने के लिए वृंदावन स्थित आश्रम पहुंचे थे।उनके इस बयान के बाद धार्मिक टैटू बनवाने की प्रथा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग इसे श्रद्धा का प्रतीक मानते हैं वहीं कुछ इसे धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन भी समझते हैं।