झारखंड के सरायकेला-खरसावां (Saraikela-Kharsawan) जिले में एक खास जगह है, जहां हर साल मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के बाद पहला शनिवार (Saturday) सिर्फ महिलाओं के लिए मेला (Fair) लगता है। इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पुरुषों की एंट्री (Entry) पर बैन (Ban) है।
मेला में झारखंड के सरायकेला, खरसावां, राजनगर, जमशेदपुर, सीनी के अलावा पड़ोसी राज्य ओड़िशा (Odisha) से भी महिलाएं आती हैं। महिलाएं यहां पिकनिक (Picnic) मनाने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने आती हैं। खरकई नदी (Kharakai River) के बीचोंबीच स्थित चट्टानों पर महिलाएं अपने पसंदीदा व्यंजन का स्वाद (Taste) लेती हैं। कई महिलाएं समूह (Groups) में आती हैं और मेला स्थल पर खाना बनाकर खाती हैं, जबकि कई अपने घर से Packed Food लेकर आती हैं।
मेला में शाकाहारी (Vegetarian) भोजन ही परोसा जाता है और यहां के अधिकांश स्टाल्स (Stalls) भी महिलाएं चलाती हैं। सुबह से शाम तक बच्चे और महिलाएं यहां Day Out और Fun Activities का आनंद लेते रहते हैं।
इस अवसर पर बाबा गर्भेश्वर नाथ (Baba Garbheswar Nath) की पूजा-अर्चना भी की जाती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे दिल से की गई पूजा से उनकी मनोकामना (Wishes) पूरी होती है। स्थानीय किंवदंती (Legend) के अनुसार, महाभारत काल में पांडव पुत्र के अज्ञातवास के दौरान यहां विश्राम किया था और उनके पैरों के निशान आज भी पत्थरों पर दिखाई देते हैं।
क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि महिला मेला में पुरुषों का प्रवेश हमेशा से बैन (Ban) रहा है। हालांकि, वर्तमान में कुछ पुरुष भी मेला (Fair) में दिखाई दे जाते हैं, लेकिन महिलाएं अभी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहती हैं।
श्रद्धालु कन्या कुमारी साहू (Kumari Sahu) कहती हैं, ‘मिर्गी चिंगड़ा का मेला हमारी परंपरा (Tradition) से जुड़ा हुआ है। पहले यहां हम बचपन से आते हैं। पहले बाबा की पूजा (Pooja) करते हैं और फिर पिकनिक (Picnic) का आनंद लेते हैं।’
कल्पना दास का कहना है कि यह मेला हमारी ऐतिहासिक विरासत (Heritage) का हिस्सा है और ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
स्थानीय महिलाएं मानती हैं कि बाबा गर्भेश्वर नाथ की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर (Suitable Groom) प्राप्त होता है। मेला महिलाओं के लिए Social Bonding, Recreation और Family Time का भी माध्यम बन चुका है।