गंजडुंडवारा (कासगंज)।
उत्तर प्रदेश सरकार भले ही सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है
ताजा मामला कासगंज जनपद के गंजडुंडवारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) से सामने आया है, जहाँ स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार ही सरकार की मंशा को चूना लगा रहे हैं। अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की लेटलतीफी के कारण मरीजों को बिना इलाज और दवा लिए ही बैरंग लौटना पड़ रहा है।
*मीडिया को देख आनन-फानन*
मीडिया कर्मियों को देख खुला ताला, 9 बजे तक गायब रहे डॉक्टर
शनिवार सुबह जब मीडिया कर्मियों की टीम गंजडुंडवारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँची, तो वहाँ का नजारा बेहद चौंकाने वाला था। सुबह के 8:30 बज चुके थे, लेकिन अस्पताल का ताला तक नहीं खुला था और अंदर सिर्फ एक मोटरसाइकिल घूमती दिखाई दे रही थी। मीडियाकर्मियों की मौजूदगी की खबर फैलते ही आनन-फानन में अस्पताल का ताला तो खोल दिया गया, लेकिन सुबह 9:00 बजे तक अस्पताल में एक भी डॉक्टर अपनी सीट पर मौजूद नहीं था।
*दूर-दराज से आए मरीज तड़पते रहे और बिना दवाई लिए ही वापस लौटने को मजबूर मरीज*
दूर दराज से आए मरीज दवाई लेने के लिए तड़पते रहे और डॉक्टर ना होने की वजह से बिना दवाई लिए उनका घर वापस जाना पड़ा मरीज ने बताया कि अभी 9:00 बज चुके हैं कोई डॉक्टर मौजूद नहीं है यहां का स्टाफ बता रहा है कि आपको 10:00 बजे दवाई मिलेगी मरीज की हालत खराब होने की वजह से मरीज बिना दवाई लिए ही लौट गया नहीं कर पाया इंतजार
*अस्पताल में मचे हड़कंप*
मीडिया की खबर मिलते ही प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आकाश कुमार आनन-फानन में केंद्र पर पहुँचे। जब मीडिया ने उनसे समय पर अस्पताल न खुलने और डॉक्टरों की अनुपस्थिति पर सवाल किया, तो उन्होंने एक अजीबोगरीब दलील दी। डॉ. आकाश ने बताया:
"हमारा स्टाफ कासगंज से ट्रेन से आता है, जो लगभग 10:00 बजे पहुँचती है। उसके बाद ही मरीजों को दवाई दी जाती है।"
जब उनसे पूछा गया कि तब तक स्वास्थ्य केंद्र किसके भरोसे चल रहा है, तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा, "अभी हम हैं, हम ही पूरा हॉस्पिटल देखते हैं।
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'*ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधन इकाई' में लटका ताला, गंदगी का अंबार*
मीडिया टीम ने जब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत संचालित 'ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधन इकाई' का रुख किया, तो वहाँ भी ताला लटका मिला। इस पर डॉ. आकाश ने बेफिक्री से जवाब दिया कि यह इकाई सुबह 10:00 बजे ही खुलती है।
अस्पताल की दुर्दशा यहीं खत्म नहीं होती। स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखाते हुए सुबह 9:00 बजे तक पूरे अस्पताल परिसर में साफ-सफाई तक नहीं हो सकी थी। चारों तरफ गंदगी का साम्राज्य देखने को मिला, जिससे मरीजों में संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
*CMO का बयान: जानकारी कर देंगे नसीहत*
इस पूरे मामले के संबंध में जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से बात की गई तो उन्होंने कहा:
"हम मामले की जानकारी करके जल्दी बताएंगे। अगर ऐसा होता है, तो स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों को नसीहत दी जाएगी।"
*जनता का सवाल- कहाँ हैं जिम्मेदार*
लाखों रुपये का वेतन उठाने वाले डॉक्टर और स्टाफ अगर अपनी मर्जी से 10 बजे दफ्तर आएँगे, तो सुबह 8 बजे से लाइन में लगे गरीब मरीजों का क्या होगा? गंजडुंडवारा स्वास्थ्य केंद्र की इस घोर लापरवाही ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि कासगंज के मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला प्रशासन इस लापरवाह स्टाफ और प्रभारी पर क्या सख्त कार्रवाई करते हैं या सिर्फ 'नसीहत' देकर मामला शांत करा दिया जाता है।