दीनबंधु राउत / रफ्तार मीडिया संवाददाता जामताड़ा।
पसमांदा नेता मौलाना अब्दुल रकीब अंसारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि इस्लाम ज्ञान, बुद्धिमत्ता, न्याय और करुणा का संदेश देने वाला धर्म है। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया, यूट्यूब और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से धार्मिक जानकारियां तेजी से लोगों तक पहुंच रही हैं। ऐसे में किसी भी धार्मिक संदेश या जानकारी को बिना जांचे-परखे आगे बढ़ाना उचित नहीं है। मौलाना अंसारी ने कहा कि क्रिटिकल थिंकिंग का अर्थ धर्म पर संदेह करना नहीं, बल्कि कुरान और हदीस को उनके संदर्भ, भाषा और प्रामाणिक व्याख्या के साथ समझना है। धार्मिक विषयों की जानकारी के लिए योग्य एवं प्रामाणिक विद्वानों से मार्गदर्शन लेना जरूरी है।उन्होंने सूरह अन-निसा की आयत 82 और सूरह अल-हुजुरात की आयत 6 का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक संदेशों और खबरों को समझने तथा उनकी पुष्टि करने की शिक्षा दी गई है।उन्होंने कहा कि कई बार कुरान की आयतों और हदीसों को संदर्भ से अलग प्रस्तुत किए जाने से गलतफहमियां पैदा होती हैं। धार्मिक विद्वानों, इमामों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं तक इस्लाम का संदेश शांति, दया, न्याय और भाईचारे के साथ पहुंचाएं। मौलाना ने मस्जिदों, मदरसों और धार्मिक शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के साथ डिजिटल साक्षरता, नैतिकता और आपसी सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों को सवाल पूछने और विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षाओं की सही और जिम्मेदार समझ समाज में नफरत व विभाजन को कम कर एकता और भाईचारे को मजबूत कर सकती है।