नई दिल्ली:लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा नारी शक्ति वंदन संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो सका। मत विभाजन के दौरान कुल 528 वोट पड़े, जिनमें 298 समर्थन में और 230 विरोध में रहे, जिससे विधेयक गिर गया।
इस विधेयक के साथ परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल थे, जिन्हें लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया। विपक्ष का कहना था कि परिसीमन की आड़ में सीटों के स्वरूप में बदलाव किया जा सकता है, जिससे कुछ राज्यों पर असर पड़ेगा।
सरकार की ओर से Narendra modi और Amit shah ने विपक्ष को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि परिसीमन सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। यहां तक कि इसे संशोधित विधेयक में शामिल करने की बात भी कही गई, लेकिन विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा।
मत परिणाम घोषित होते ही विपक्षी दलों ने खुशी जाहिर की, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा ऐतिहासिक मौका गंवाना बताया।kiren rijiju ने कहा कि विपक्ष ने एक बड़ा अवसर खो दिया और सरकार भविष्य में महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस घटनाक्रम के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में यह एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है, जहां विभिन्न दल इसे लेकर अपनी रणनीति तय करेंगे।