सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया विशेष संवाददाता

नई दिल्ली/रांची:नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद का बैठक  का आयोजन गुरुवार को नई दिल्ली में किया गया। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग के बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। इस दौरान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड के संपूर्ण और संतुलित विकास का  रोडमैप प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से सहयोग की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा तभी राज्य के विकास की वास्तविक ताकत बन सकती है, जब उसे मानव पूंजी, आधुनिक उद्योगों, शिक्षा, कौशल और तकनीक से जोड़ा जाए।


*झारखंड को देश के विकास यात्रा में मजबूत साझेदार के रूप में देखना चाहिए*
मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने स्पष्ट कहा कि झारखंड को केवल खनिज उत्पादन करने वाले राज्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उसे देश की विकास यात्रा में एक मजबूत साझेदार के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य में उपलब्ध खनिज संसाधनों का स्थानीय स्तर पर वैल्यू एडिशन, मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की स्थापना तथा रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रीय किया।

*झारखंड को बनाना है उद्योग और नवाचार का केंद्र- मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन*
नीति आयोग के बैठक में विभिन्न राज्यों से आए मुख्यमंत्रियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए इस दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने बताया केंद्र सरकार से क्रिटिकल मिनरल्स आधारित उद्योगों के विकास, रिसर्च एवं इनोवेशन सेंटर स्थापित करने तथा निवेश को बढ़ावा देने में सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की अपार संभावनाएं हैं।उन्होंने बताया कि किस प्रकार से झारखंड सरकार एआई आधारित मिनरल एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल माइनिंग प्रथाओं को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि झारखंड को उद्योग और रोजगार का नया केंद्र बनाया जा सके।

*शिक्षा को बनाया विकास का आधार ताकि युवा शिक्षित हो सके- हेमन्त सोरेन*
बैठक में मौजूद मुख्यमंत्री  हेमन्त सोरेन ने मुख्य मुद्दों में से एक शिक्षा के मुद्दे में झारखंड सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय यानी की सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस  के द्वारा विद्यार्थियों का चयन अब आईआईटी और मेडिकल संस्थानों में होने लगा है। राज्य सरकार 5,000 उत्कृष्ट विद्यालय विकसित करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।उन्होंने राज्य में पीएम श्री विद्यालयों और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तथा एनसीईआरटी के क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की मांग भी केंद्र सरकार के समक्ष रखी।

*आंगनबाड़ी और पोषण पर विशेष ध्यान*
आंगनबाड़ी केंद्रों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से करीब 15 हजार के पास भवन नहीं हैं, फिर भी पोषण अभियान और समर कार्यक्रम के माध्यम से कुपोषण नियंत्रण में  सफलता प्राप्त हुई है।  उन्होंने बताया कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य को ध्यान रखते हुए  प्रतिदिन अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है तथा राज्य सरकार अपने संसाधनों से 5,000 नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण कर रही है।

*हर साल एक लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य- हेमन्त सोरेन*
इन दिनों देश में बढ़ती बेरोजगारी चिंताजनक विषय है जिसका असर झारखंड में भी देखने को मिल रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने नीति बनाई के बैठक के दौरान अपने संबोधन में बताया कि राज्य सरकार प्रतिवर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ रही है। वहीं, उन्होंने सारथी योजना  का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के अंतर्गत 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। एआई, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ड्रोन और सोलर तकनीक जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अब तक 53 हजार महिलाओं को आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

*पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की तैयारी*
स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री  हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में 1,276 दवा दुकानें ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता बताई तथा एआई आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल विकसित करने की योजना की जानकारी दी।

*खेलों में झारखंड की बढ़ती पहचान*
झारखंड के यूवाओ में अपार टैलेंट है इसका जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के खिलाड़ी हॉकी, फुटबॉल और एथलेटिक्स में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की मांग करते हुए खेल संघों में पारदर्शिता और सुधार पर भी जोर दिया।

*कृषि को बताया कुपोषण से लड़ाई का प्रभावी हथियार*
देश एक कृषि पधान देश है ऐसे में नीति आयोग की बैठक के दौरान  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं और 1.5 लाख एकड़ भूमि में फलदार पौधरोपण किया गया है। उन्होंने बताया कि झारखंड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहा है। कृषि को कुपोषण से लड़ने का प्रभावी माध्यम बताते हुए उन्होंने कृषि आधारित आजीविका को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

*झारखंड सरकार डिजिटल गवर्नेंस में एआई का  कर रही उपयोग*
वर्तमान परिस्थिति में एआई की चर्चा हर क्षेत्र में हो रही है इस बीच नीति आयोग की बैठक में भी एआई को लेकर सार्थक चर्चा हुई। मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य सरकार के प्रयासों को लेकर जानकारी देते हुए कहा  कि राज्य सरकार एआई आधारित सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। साथ ही इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर पर भी कार्य चल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से डेटा शेयरिंग को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने का अनुरोध किया तथा डीबीटी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और डिजिटल धोखाधड़ी रोकने पर जोर दिया।

*केंद्र सरकार के समक्ष रखीं प्रमुख मांगें*
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बुलाए महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र के समक्ष उठाया। इनमें जल जीवन मिशन की शेष 6,000 करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने, कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये के भुगतान, डीएमएफटी मानकों में संशोधन तथा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग शामिल रही।इसके अलावा उन्होंने स्कूली शिक्षा से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और निधियों के एकीकरण, पीपीपी मोड पर प्रस्तावित छह मेडिकल कॉलेजों में शेष दो कॉलेजों की स्वीकृति, झारखंड को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी का अवसर देने तथा डीवीसी, सीसीएल और ईसीएल कमांड एरिया वाले जिलों में सामाजिक आधारभूत संरचना निर्माण के लिए भूमि संबंधी प्रक्रियाओं में छूट और सरलीकरण की मांग भी उठाई।

*विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में झारखंड की बड़ी भूमिका*
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास किसी भी राज्य की प्रगति की बुनियाद हैं। ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में झारखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय तथा संसाधनों के न्यायसंगत उपयोग की आवश्यकता है। उन्होंने दोहराया कि झारखंड को खनिज प्रदेश से आगे बढ़ाकर मैन्युफैक्चरिंग हब, नॉलेज इकोनॉमी और रोजगार सृजन के अग्रणी राज्य के रूप में विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।