सौरभ राय/ रांची: जनगणना 2027 की प्रक्रिया  एक मई 2026 से प्रारंभ हुई जो कि डिजिटल जनगणना है 15 मई तक चलेगी जिसमें हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना शामिल है जिसके बाद जनसंख्या गणना चरण फरवरी 2027 में प्रारंभ होगी। जनगणना की प्रक्रिया के बीच सरना धर्म कोड की मांग पुनः तेज हो चुकी हैं दरअसल पिछले दिनों मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जनगणना में सरना धर्म कोड लागू करने की मांग कर दी है और वही पत्र की कॉपी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यपाल संतोष गंगवार को भी भेजा गया है।

*जनगणना में सरना धर्म के लिए पृथक कोड की आवश्यकता- हेमन्त सोरेन*
सरना धर्म कोड की मांग झारखंड का आदिवासी समाज लंबे समय से कर रहा है इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि सरना धर्म आदिवासी समाज की आस्था, परम्परा और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख आधार है इसलिए इसे जनगणना में पृथक कोड देनी चाहिए।

*आदिवासी समाज की घटती जनसंख्या का किया जिक्र*
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पत्र के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झारखंड में आदिवासी समाज की घटती जनसंख्या को लेकर जानकारी दी है। उन्होंने युक्त पत्र में लिखा कि अगर हम वर्तमान मे ठोस कदम नहीं उठाए तो आदिवासी समाज की भाषा और संस्कृति के साथ साथ उनका अस्तित्व भी खत्म हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि पिछले 8 वर्षों में किए गए विश्लेषण जानकारी दे रही हैं कि आदिवासी समाज की जनसंख्या का प्रतिशत राज्य में 38 से घटकर 26 प्रतिशत हो चुका है।

*आदिवासियों की पहचान बचाने का उपाय सरना धर्म कोड- मुख्यमंत्री*
सरना धर्म कोड के लिए कई आदिवासी संगठनों ने आंदोलन भी किया वहीं झारखंड विधानसभा से सरना धर्म कोड को पारित भी कर दिया गया है अब केंद्र सरकार को इस दिशा में निर्णय लेनी है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अपने पत्र में कहा कि आदिवासी समाज की जनसंख्या में हो रही गिरावगत चिंता का विषय है जिस कारण संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची के तहत आदिवासी नीतियों में नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति उनका अस्तित्व को बचाने के लिए सभी धर्मो से हटकर एक अलग सरना धर्म कोड को जनगणना 2027 में जगह देना काफी महत्वपूर्ण है इसलिए केंद्र सरकार इस दिशा में उचित निर्णय लेने का कार्य करे।

*जनगणना को शुरू करना एक महत्वपूर्ण कदम*
2011 के बाद अब जनगणना 2027 आयोजित कराई जा रही है पहली चरण की प्रक्रिया डिजिटल जनगणना के तहत प्रारंभ हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने केंद्र सरकार के पहल को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देश के स्वर्णिम विकास के लिए तथ्य आधारित जनगणना मिल का पत्थर साबित होती हैं  इस प्रक्रिया में राज्य सरकार भी अपना पूरा सहयोग दे रही हैं मैने खुद स्व गणना कर इस अभियान में अपनी सहभागिता निभाई है।

*सरना धर्म कोड से प्राकृतिक  प्रेम का संदेश फैलेगा*
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन द्वारा लिखे गए पत्र में आदिवासी समाज का पर्यावरण के प्रति निष्ठा को भी दर्शाया गया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में देश के साथ साथ पूरा विश्व जहां पर्यावरण बचाने के लिए कई योजनाएं बना रहा है तो वहीं आदिवासी समाज सदियों से प्राकृति से जुड़ा है एवं पर्यावरण के लिए कई योगदान भी दिया जा रहा है अगर सरना धर्म कोड लागू होगा तो विश्व में प्राकृतिक प्रेम का संदेश भी निश्चित रूप से फैलेगा।