कुमार विक्रम/रफ्तार मीडिया: दुमका-सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को बयां करता एक गंभीर मामला दुमका जिले के मसलिया प्रखंड से सामने आया है। यहाँ बलियाजोड़ पंचायत के कालीपाथर गाँव में एक बेबस परिवार पिछले दो वर्षों से जर्जर और आधे ढह चुके मकान में, यानी सीधे तौर पर मौत के साये में जीने को मजबूर था। हालांकि, रफ्तार मीडिया में मामला आने के बाद प्रशासन ने इस पर बेहद त्वरित और सराहनीय कदम उठाया है।कालीपाथर गाँव की निवासी निर्मला हेम्ब्रम ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि पति की मृत्यु के बाद पूरे परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर आ गई थी। दो वर्ष पूर्व हुई भारी बारिश इस गरीब परिवार पर आफत बनकर टूटी और उनका आशियाना आधा ढह गया। तब से निर्मला अपनी दो बेटियों—विनीता सोरेन (15 वर्ष), आसन्ति सोरेन (17 वर्ष) और एक पुत्र राजदीप सोरेन (20 वर्ष) के साथ उसी असुरक्षित और कभी भी गिर सकने वाले मकान में सोती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। हालांकि सरकार की ओर से उन्हें राशन मिल जाता है, लेकिन सिर छिपाने के लिए एक सुरक्षित छत नसीब नहीं थी।
खबर का असर: प्रशासन ने दिखाया संवेदनशीलता
जैसे ही इस असहाय परिवार की लाचारी की खबर सामने आई, मसलिया के प्रखंड विकास पदाधिकारी अजफर हसनैन ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए त्वरित कार्रवाई की और खुद कालीपाथर गाँव पहुँचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। बीडीओ ने सुरक्षा के मद्देनजर तत्काल परिवार के लिए वैकल्पिक आशियाने का इंतजाम कराया।
तकनीकी पेंच और बीडीओ का पक्ष
मामले की पूरी सच्चाई और तकनीकी स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी अजफर हसनैन ने बताया। "यह महिला मूल रूप से दलाही पंचायत के मधुबन गाँव की निवासी हैं। पूर्व में कालीपाथर गाँव के स्थानीय लोगों ने मानवता के नाते इन्हें जगह देकर यहाँ घर बनवा दिया था। वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना में महिला का नाम दर्ज है और उन्हें आवास स्वीकृत किया जाएगा। लेकिन महिला अब अपने मूल गाँव मधुबन में ही घर बनाना चाहती हैं, जिसके कारण इस प्रक्रिया में समय लगा। फिलहाल इनके रहने की सुरक्षित व्यवस्था कर दी गई है।"
प्रशासन की इस त्वरित पहल से जहाँ एक तरफ एक बड़े हादसे को टाल दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ पीड़ित परिवार को भी जल्द ही अपना नया पक्का मकान मिलने की उम्मीद जगी है।