सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया

रांची: राजधानी रांची के नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स 2 के निर्माण को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ज्ञात हो कि झारखंड सरकार के कैबिनेट बैठक में  रिम्स 2 के निर्माण को स्वीकृति दिए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल भाजपा भी सरकार पर लगातार हमलावर है।इसी क्रम में मंगलवार को जमीन बचाओ संघर्ष समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन से मुलाकात कर नगड़ी की जमीन बचाने के लिए पुनः आंदोलन का नेतृत्व करने का आग्रह किया।


जब भी नगड़ी अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, अधिकारियों ने नहीं कराया उपलब्ध- चम्पाई सोरेन

नगड़ी के स्थानीय ग्रामीणों से मुलाकात के बाद चम्पाई सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार वर्ष 1957-58 के जिस भूमि अधिग्रहण का हवाला दे रही है, वह कभी पूरा ही नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि उस समय स्थानीय विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह ने अधिग्रहण की प्रक्रिया रोक दी थी।उन्होंने कहा कि रिंग रोड निर्माण के दौरान बिरसा कृषि विश्वविद्यालय ने भी लिखित रूप से बताया था कि संबंधित भूमि का अधिग्रहण कभी पूरा नहीं हुआ। उनका आरोप है कि जब भी अधिग्रहण से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, अधिकारियों ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया।

ग्रामीणों को मुआवजा प्रदान नहीं करने का लगाया आरोप

चम्पाई सोरेन ने भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 की धारा 24(2) का हवाला देते हुए कहा कि यदि पुराने अधिग्रहण के मामलों में सरकार के पास भूमि का भौतिक कब्जा नहीं है अथवा प्रभावित लोगों को मुआवजा नहीं दिया गया है, तो अधिग्रहण की प्रक्रिया स्वतः समाप्त मानी जाएगी। उनका दावा है कि नगड़ी में न तो किसानों को मुआवजा दिया गया और न ही सरकार के पास जमीन का वास्तविक कब्जा था, क्योंकि वहां वर्षों से खेती होती रही है।

विरोध अस्पताल से नहीं किसानों के उपजाऊ जमीन पर अस्पताल बनाने का विरोध है- चम्पाई सोरेन

पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध अस्पताल निर्माण का नहीं, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन पर अस्पताल बनाए जाने का है। उन्होंने कहा कि रांची में अन्य स्थानों पर बंजर एवं सरकारी भूमि उपलब्ध है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि सरकार एचईसी से सैकड़ों एकड़ भूमि ले चुकी है और अतिरिक्त 500 एकड़ भूमि लेने की तैयारी भी कर रही है। ऐसे में रिम्स-2 का निर्माण वहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित क्षेत्र में सीएनटी एक्ट सहित आदिवासियों और मूलवासियों के संरक्षण के लिए बने कानूनों की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि यदि सरकार जबरन भूमि अधिग्रहण का प्रयास करेगी तो लोगों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

पुनः आंदोलन की चेतावनी

रिम्स 2 निर्माण के विरोध में नगड़ी के स्थानीय ग्रामीणों के आग्रह पर आंदोलन शुरू करने की मांग पर चम्पाई सोरेन ने कहा कि पिछले वर्ष नगड़ी आंदोलन में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे और यदि सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो एक बार फिर पूरे झारखंड से लोग नगड़ी पहुंचकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि किसान अपनी जमीन बचाने के लिए हरसंभव संघर्ष करेंगे और अपनी पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ेंगे।