सालानपुर:चुनावी नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल के बाराबनी और सालानपुर इलाके में तोड़फोड़ की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पंचायत दफ्तरों पर हमले, फाइलें फाड़ना और ताले लटकाने के बाद अब सरकारी प्रोजेक्ट भी निशाने पर हैं। सवाल उठ रहा है कि जनता के पैसे से बने ढांचों को नुकसान पहुंचाकर आखिर किसका भला हो रहा है? सालानपुर के कल्ला-चयनपुर में सरकारी योजना के तहत बना सामुदायिक शेड रात के अंधेरे में गिरा दिया गया। आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने वहां जमकर उत्पात मचाया। यह शेड गांव के लोगों के सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया था। स्थानीय लोग हैरान हैं कि आखिर जनता की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से क्या हासिल होगा? राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि लंबे समय से दबे गुस्से और कथित जुल्म के जवाब में कुछ लोग हिंसा का रास्ता अपना रहे हैं। विरोधियों के दफ्तरों और नेताओं के घरों तक गुस्सा पहुंच रहा है, लेकिन आम लोगों के काम आने वाले ढांचे तोड़ना समझ से परे है। गौर करने वाली बात है कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से हिंसा से बचने और शांतिपूर्ण तरीके से जीत का जश्न मनाने की अपील की है। इसके बावजूद दुकानों में लूटपाट, सरकारी प्रोजेक्ट में तोड़फोड़ और पंचायत दस्तावेजों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं जारी हैं। इलाके में शक गहराता जा रहा है कि क्या यह सिर्फ गुस्से का इजहार है या इसके पीछे कोई और मकसद छिपा है? लेकिन एक बात साफ है कि इस हिंसा का सबसे बड़ा खामियाजा आम लोगों को ही भुगतना पड़ रहा है।