ब्रेकिंग न्यूज़ | मोतिहारी: मोतिहारी जिले के अंतर्गत एक पंचायत में छठ घाट निर्माण कार्य को लेकर गंभीर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई है। ग्रामीणों द्वारा मिली सूचना के आधार पर जब स्थानीय पत्रकार ओमप्रकाश तिवारी मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण किया, तो कई चौंकाने वाली कमियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि घाट निर्माण में मानकों की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में कार्य किया जा रहा था, जिससे भविष्य में यह घाट किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।
पत्रकार द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खबर का संकलन किया गया और उसे विभिन्न मीडिया समूहों में साझा किया गया, ताकि समय रहते संबंधित अधिकारी संज्ञान लेकर सुधारात्मक कार्रवाई कर सकें। लेकिन इस पहल के बाद स्थिति ने एक चिंताजनक मोड़ ले लिया।
आरोप है कि पंचायत के मुखिया  के पति रामाधार राम द्वारा पत्रकार को फोन पर धमकी दी गई। बातचीत के दौरान कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया और एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी दी गई। इतना ही नहीं, 50,000 रुपये की कथित मांग और फर्जी आरोप लगाने की भी बात कही गई, जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला माना जा रहा है।
पत्रकार ओमप्रकाश तिवारी का कहना है कि वे सिर्फ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे और समाज के हित में सच्चाई को सामने लाना उनका दायित्व है। लेकिन इस तरह की धमकियों और मानसिक प्रताड़ना ने उन्हें गहरे तनाव में डाल दिया है। उन्होंने बताया कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है और उन्हें भय का वातावरण महसूस हो रहा है।
यह घटना न केवल एक पत्रकार की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज के समय में कोई भी व्यक्ति खुले तौर पर गलत कार्यों का विरोध कर सकता है? आम नागरिक और ग्रामीण भी इस तरह की घटनाओं से भयभीत हो सकते हैं, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलने की आशंका बढ़ जाती है।
पत्रकार ने जिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने जिले के पुलिस अधीक्षक और जिला पदाधिकारी से अपेक्षा जताई है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उनका विश्वास है कि प्रशासन सच्चाई का साथ देगा और किसी निर्दोष को फंसने नहीं देगा।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि कानून का दुरुपयोग किस हद तक हो रहा है और क्या सभी नागरिकों को समान रूप से न्याय मिल पा रहा है। पत्रकार ने यह भी मांग उठाई है कि समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनों की समीक्षा होनी चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय न हो सके।
अंत में, ओमप्रकाश तिवारी ने स्पष्ट किया कि वे सत्य और निष्पक्षता के मार्ग पर आगे भी डटे रहेंगे, चाहे उन्हें कितनी भी कठिनाइयों का सामना क्यों न करना पड़े। उन्होंने कहा कि “सत्य को दबाया नहीं जा सकता, उसे केवल थोड़े समय के लिए रोका जा सकता है, लेकिन अंततः सत्य की ही विजय होती है।”
(रिपोर्ट: रफ्तार मीडिया, मोतिहारी)