मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज कहा कि पंजाब महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन की इबारत लिखने के लिए तैयार है, क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार मांवां-धीयां सत्कार योजना' के आगाज़ के साथ एक और बड़ी गारंटी पूरी कर रही है। उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब में दोपहर 12 बजे के बाद मोबाइल फोनों पर मैसेज आने शुरू हो जाएंगे, क्योंकि तीन महीने की 'सम्मान राशि' एक ही किस्त के रूप में हर महिला के बैंक खाते में 3,000 रुपये और अनुसूचित जाति (एस.सी.) समुदाय से संबंधित महिलाओं के खातों में 4,500 रुपये जमा किए जा रहे हैं। बरनाला के महिल कलां हल्के में 'लोक मिलनी' के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल महिलाओं के मान-सम्मान और वित्तीय सशक्तिकरण को सुनिश्चित करने के लिए सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि पंजाब के तेज़ विकास से बौखलाए विरोधी राज्य की तरक्की में रोड़ा अटकाने की साजिशें रच रहे हैं।
*महिल कलां में लोक मिलनी के दौरान छतों पर जमा भीड़ द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का ज़ोरदार स्वागत*

जब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान बरनाला के महिल कलां हल्के में लोक मिलनी को संबोधित कर रहे थे, तो उनके पूरे भाषण के दौरान लोगों ने नारों के साथ उनका स्वागत किया। लोगों की भीड़ इतनी अधिक थी कि पंडाल में जगह कम पड़ गई, जिसके कारण सैकड़ों समर्थकों को नज़दीकी घरों और इमारतों की छतों से रैली देखनी पड़ी। वे मुख्यमंत्री के समर्थन में पोस्टर लहराते रहे और उनकी बातों का उत्साहपूर्वक जवाब देते रहे। रैली स्थल के आस-पास की हर छत पर लोगों की बड़ी भीड़ थी। लोक मिलनी के दौरान सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस ऐतिहासिक स्कीम की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने कहा, "1 जुलाई से महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे आने शुरू हो जाएंगे। मांवां-धीयां सत्कार योजना' के तहत हर महिला को 1,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह मिलेंगे। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी और जो महिलाएं पहले से ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन ले रही हैं, वे भी इसके लिए पात्र होंगी। पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए राज्य सरकार ने बजट में 9,300 करोड़ रुपये रखे हैं।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को मान-सम्मान और वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह योजना शायद महिलाओं को अमीर न बनाए, लेकिन यह उन्हें मान-सम्मान और स्वाभिमान ज़रूर देगी। महिलाएं सबसे अधिक सम्मान की हकदार हैं। माताओं और बहनों के आशीर्वाद हर चुनौती को पार करने में मदद कर सकते हैं। परिवार की भलाई, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक और आर्थिक फैसलों में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए उनकी वित्तीय आज़ादी को मजबूत करना बहुत ज़रूरी है।” सरकार की जन-पक्षीय पहलों का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार लोगों की भलाई के लिए दिन-रात काम कर रही है। हमने घरों को मुफ्त बिजली दी है, 68,000 से अधिक नौजवानों को बिना किसी भ्रष्टाचार के सरकारी नौकरियां दी हैं, सड़कों का नवीनीकरण किया, टोल प्लाज़ा बंद करके रोज़ाना करीब 70 लाख रुपये बचाए हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा को मजबूत किया है, बुनियादी ढांचा तैयार किया है और कई अन्य अहम कदम उठाए हैं। जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली थी, तब सिंचाई के लिए सिर्फ 22 प्रतिशत नहरी पानी का इस्तेमाल हो रहा था। आज यह आंकड़ा बढ़कर 80 प्रतिशत से अधिक हो गया है। हम राज्य भर के गांवों के विकास के लिए ग्रांट भी दे रहे हैं।"

राज्य के स्वास्थ्य सुधारों के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “'मुख्यमंत्री सेहत योजना' देश की अपनी तरह की पहली योजना है, जो पंजाब के हर निवासी परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराती है। यह बहुत गर्व की बात है कि पंजाब ऐसी व्यापक स्वास्थ्य सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस योजना ने मानक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करते हुए लोगों पर वित्तीय बोझ को काफी कम किया है। इसका उद्देश्य राज्य के हर परिवार को व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है और लोग पहले से ही इस योजना के तहत 650 करोड़ रुपये से अधिक के मुफ्त इलाज का लाभ ले चुके हैं।” राज्य को स्वस्थ और नशा मुक्त बनाने के लिए सरकार के एजेंडे की बात करते हुए उन्होंने कहा, "हमारी सरकार 15 जुलाई तक पंजाब भर में 3,100 नए बने खेल मैदान लोगों को समर्पित करेगी। नशों के खिलाफ हमारी मुहिम में खेलों को बढ़ावा देना सबसे कारगर हथियार है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेलों को बढ़ावा देकर हम अपने नौजवानों की असीम ऊर्जा को सही दिशा की ओर मोड़ रहे हैं। खेलों में उलझे नौजवानों के पास नशों की ओर देखने का समय भी नहीं होता, क्योंकि वे अपनी पूरी ऊर्जा दांव-पेंच लगाने में लगाते हैं। यह पहल नशों की विभीषिका को खत्म करने और नौजवानों को सूबे के सामाजिक-आर्थिक विकास में बराबर का भागीदार बनाने में बहुत सहायक साबित होगी।"

पिछले चार वर्षों के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में आई तब्दीली का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "सत्ता संभालने के बाद हमारी सरकार ने पंजाब की तरक्की और खुशहाली, खासकर शिक्षा क्षेत्र पर विशेष ज़ोर दिया। पिछली सरकारों ने सरकारी स्कूलों को सिर्फ 'मिड-डे मील' के केंद्र बनाकर रख दिया था, लेकिन आज इन स्कूलों को शिक्षा के धुरे में बदल दिया गया है। हम शिक्षा को मजबूत करने के मिशन के साथ काम कर रहे हैं, ताकि गरीब से गरीब बच्चे को भी मानक शिक्षा मिल सके।"
स्कूली शिक्षा में राज्य की उपलब्धि को साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "हमारी सरकार की अथक कोशिशों के बदौलत पंजाब प्राइमरी और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पछाड़कर नंबर एक स्थान पर पहुंच गया है। हमने प्राइमरी और मिडिल स्कूलों को अपग्रेड किया है, शिक्षा प्रणाली को मजबूत किया है, स्मार्ट क्लासरूम शुरू किए हैं और अध्यापकों को उन्नत प्रशिक्षण दिया है। इन निरंतर कोशिशों के नतीजे के रूप में पंजाब अब स्कूली शिक्षा में देश का नेतृत्व कर रहा है। नीति आयोग द्वारा जारी किए गए ताज़ा आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि पंजाब प्राइमरी और मिडिल स्कूल शिक्षा में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली को पीछे छोड़कर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य बन गया है।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "पिछले चार वर्षों से हमारी सरकार ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और स्मार्ट क्लासरूमों पर ध्यान केंद्रित किया है और आज पंजाब शीर्ष पर खड़ा है। पहले केरल पहले स्थान पर था, लेकिन अब पंजाब ने बड़े अंतर से पहला स्थान हासिल कर लिया है। आने वाले वर्षों में भी हम और अधिक प्रयास जारी रखेंगे क्योंकि शिक्षा वह प्रकाश है जो अंधकार को दूर कर दुनिया को रोशन करता है।"
हर बच्चे को शिक्षा के समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार का दृढ़ विश्वास है कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए। हम शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं ताकि सामान्य परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें जो किसी अन्य को मिलते हैं। शिक्षा आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाने और समृद्ध पंजाब के निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम है तथा हमारी सरकार इसे और मजबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।"

'जगत ज्योति गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम-2026' के पारित होने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं परमात्मा का आभारी हूँ जिसने मुझे 'जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' पारित करने का सौभाग्य प्रदान किया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की प्रत्येक घटना ने करोड़ों लोगों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाई थी। परमात्मा ने मुझे विधि विशेषज्ञों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह कानून लाने की शक्ति और बुद्धि प्रदान की।” भविष्य में बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया, "हमारी सरकार ने इस कानून को बहुत सोच-समझकर तैयार किया है ताकि भविष्य में कोई भी संशोधन या खामी इसे कमजोर न कर सके। यह कानून समाज विरोधी तत्वों के लिए एक मजबूत रोक का काम करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी इस प्रकार का घिनौना अपराध दोबारा करने का साहस न करे। पहले बेअदबी के दोषी यह कहकर सजा से बच जाते थे कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है या वे मानसिक रूप से बीमार हैं। लेकिन यदि कोई वास्तव में मानसिक रूप से बीमार है तो वह केवल गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही क्यों निशाना बनाता है? वह किसी रेल इंजन से क्यों नहीं टकराता या बिजली के खुले तारों को क्यों नहीं छूता?"

विपक्षियों पर अपना शब्दिक हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, "अकाली बेअदबी विरोधी कानून का पूरी ताकत से विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उन्हें अतीत में किए गए अपने अपराधों का जवाब देना पड़ेगा। वे बेअदबी की साजिशें रचने वाली देश-विरोधी ताकतों के साथ मिले हुए थे। अब इन नेताओं को अपने बुरे कर्मों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, इसलिए वे और उनकी कठपुतलियाँ इस कानून का विरोध कर रही हैं। हालांकि, कोई भी विरोध मुझे जनता की भलाई के लिए काम करने से नहीं रोक सकता और मैं इस उद्