सौरभ राय/बोकारो/रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने शुक्रवार को बोकारो में विस्थापितों के मुद्दे पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने का संकेत दे दिया है। बता दे,वे बोकारो के सेक्टर 11 में शहीद प्रेम प्रसाद महतो की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में पहुंचे थे, जहां उन्होंने राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन पर तीखा हमला बोला।
*विस्थापितों के साथ अन्याय पर जताई नाराजगी*
अपने संबोधन में चम्पाई सोरेन ने कहा कि 1960 के दशक में भूमि अधिग्रहण के बाद भी आज तक विस्थापितों को उनका हक नहीं मिला। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि लोग आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने और जान देने को मजबूर हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर जमीन लेने के बाद विस्थापितों के साथ लगातार धोखा किया गया है।
*मेरी राजनीति की शुरुआत ही विस्थापितों की लड़ाई से हुई- चम्पाई सोरेन*
मौके पर चम्पाई सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन को याद करते हुए कहा कि उनकी शुरुआत ही टाटा स्टील और यूसीआईएल जैसी कंपनियों के खिलाफ आंदोलन से हुई थी। उन्होंने दावा किया कि इन आंदोलनों के कारण हजारों आदिवासी और मूलवासी ठेका कर्मियों को स्थायी नौकरी मिल सकी।
शहीद प्रेम प्रसाद महतो का किया जिक्र
उन्होंने पिछले वर्ष बोकारो स्टील प्लांट में नौकरी की मांग को लेकर हुए आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान एक शिक्षित युवा इंजीनियर प्रेम प्रसाद महतो की मौत हो गई थी, जिसने पूरे आंदोलन को झकझोर दिया।
*अप्रेंटिस के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप*
वहीं,पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने करीब 1500 विस्थापित युवाओं को अप्रेंटिस के नाम पर ट्रेनिंग दी, लेकिन नौकरी देने के बजाय सिर्फ सर्टिफिकेट थमा दिया। उन्होंने इसे साफ तौर पर धोखाधड़ी बताया।उन्होंने कहा कि यदि युवाओं को केवल प्रशिक्षण ही लेना होता, तो इसके लिए कई अन्य संस्थान उपलब्ध हैं, लेकिन रोजगार का वादा कर उन्हें गुमराह किया गया।
*जमीन और पहचान दोनों पर संकट*
चम्पाई सोरेन ने कहा कि एक ओर विस्थापित परिवार अपने जाति प्रमाण पत्र तक नहीं बनवा पा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी जमीन पर शॉपिंग मॉल बनाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि विकास के नाम पर ली गई जमीन का इस तरह उपयोग करने का अधिकार किसने दिया।
*डेढ़ महीने का दिया गया अल्टीमेटम*
चम्पाई सोरेन ने राज्य सरकार और कंपनी प्रबंधन को डेढ़ महीने की समय सीमा देते हुए कहा कि यदि इस दौरान विस्थापित युवाओं को नौकरी नहीं दी गई और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे रैयतों के साथ बोकारो स्टील प्लांट की खाली पड़ी जमीन पर हल चलाएंगे।
भूमि अधिग्रहण कानून का दिया हवाला
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में प्रावधान है कि यदि 12 वर्षों तक अधिग्रहीत जमीन का उपयोग नहीं होता, तो उसे वापस लौटाया जाना चाहिए। ऐसे में 60 वर्षों से खाली पड़ी जमीन को वापस करने में देरी क्यों की जा रही है।
*नगड़ी आंदोलन का दिया उदाहरण*
विस्थापितों को संदेश देते हुए चम्पाई सोरेन ने राजधानी रांची के नगड़ी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी सरकार ने आदिवासी किसानों की जमीन को घेरने की कोशिश की थी। उस समय उन्हें हाउस अरेस्ट किया गया, लेकिन जब बड़ी संख्या में लोग हल-बैल के साथ पहुंचे, तो सरकार को झुकना पड़ा।
आंदोलन से समाधान का दावा
चम्पाई सोरेन ने स्पष्ट किया कि बोकारो समेत राज्य की अन्य परियोजनाओं के विस्थापितों की समस्याओं का समाधान भी आंदोलन के जरिए ही संभव है।
उनकी इस घोषणा के बाद विस्थापितों के बीच उम्मीद जगी है और वे नगड़ी आंदोलन की तर्ज पर अपने हक की लड़ाई को आगे बढ़ाने की तैयारी में दिख रहे हैं।