ओमप्रकाश तिवारी/मोतिहारी /चिरैया। जनविश्वास, विकास और जनकल्याण की भावना को केंद्र में रखते हुए चिरैया विधानसभा क्षेत्र के महमद स्थित प्राचीन शिव मंदिर परिसर में एक भव्य धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य देश के यशस्वी प्रधानमंत्री Narendra Modi के दीर्घायु जीवन, उत्तम स्वास्थ्य तथा राष्ट्र की निरंतर प्रगति और समृद्धि की कामना करना था। इस अवसर पर सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, विधिवत पूजन, भव्य आरती, हवन तथा कन्यादान जैसे पुण्य कार्यों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य विषय “12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” रहा। उपस्थित लोगों ने कहा कि जनता के अटूट विश्वास और समर्थन के कारण देश ने बीते वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। इसी विश्वास और विकास की यात्रा को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ यह आयोजन संपन्न हुआ।
मंदिर परिसर में गूंजा हनुमान चालीसा का पाठ
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने एक स्वर में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया। पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने संकटमोचन हनुमान जी से देश, समाज और मानवता के कल्याण की प्रार्थना की।
हनुमान चालीसा पाठ के दौरान उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थना की। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। भक्ति गीतों और जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
हवन और आरती में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हनुमान चालीसा पाठ के उपरांत वैदिक विधि-विधान से हवन का आयोजन किया गया। आचार्यों एवं विद्वान पुजारियों के मार्गदर्शन में श्रद्धालुओं ने आहुति देकर राष्ट्र की उन्नति, समाज में सुख-शांति तथा जनकल्याण की कामना की।
हवन के पश्चात भव्य आरती का आयोजन हुआ। आरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर भगवान शिव, प्रभु श्रीराम एवं संकटमोचन हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्रद्धालुओं का मानना था कि धर्म और अध्यात्म के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा लोगों में सेवा और संस्कार की भावना मजबूत होती है।
राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण के लिए लिया गया संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक मूल्यों और जनभागीदारी से सुनिश्चित होती है। इसी भावना के साथ सभी ने भारत को विश्व पटल पर और अधिक मजबूत एवं विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया।
श्रद्धालुओं ने कहा कि देश के विकास और जनकल्याण की यात्रा में प्रत्येक नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना ही वास्तविक जनसेवा है। इसी सोच के साथ राष्ट्रहित और समाजहित के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया गया।
गरीब बेटी के विवाह में कन्यादान कर निभाई सामाजिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब आया जब क्षेत्र की एक गरीब एवं जरूरतमंद बेटी के विवाह में कन्यादान किया गया। आयोजकों द्वारा नवविवाहित वर-वधू को अंगवस्त्र भेंट कर आशीर्वाद दिया गया तथा आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि कन्यादान भारतीय संस्कृति में सबसे बड़े दानों में से एक माना जाता है। किसी जरूरतमंद परिवार की बेटी के विवाह में सहयोग करना न केवल सामाजिक उत्तरदायित्व है, बल्कि मानवता और सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण भी है।
वर-वधू को सुखद एवं सफल वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि समाज के सक्षम लोगों को आगे आकर जरूरतमंद परिवारों की सहायता करनी चाहिए।
पुजारियों एवं गणमान्य नागरिकों का किया गया सम्मान
धार्मिक एवं सामाजिक योगदान को सम्मान देने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कार्यक्रम में उपस्थित पुजारीगण, समाजसेवियों एवं गणमान्य नागरिकों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले लोगों का सम्मान करना प्रेरणा देने का कार्य करता है।
सम्मानित किए गए लोगों ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में सेवा, संस्कार और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को जोड़ने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
धर्म, सेवा और संस्कार का अनूठा संगम
यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेवा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया। एक ओर जहां श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ और हवन के माध्यम से राष्ट्र एवं समाज की खुशहाली की कामना की, वहीं दूसरी ओर कन्यादान और सम्मान समारोह जैसे कार्यों के माध्यम से मानवीय मूल्यों को भी सशक्त किया गया।
उपस्थित लोगों ने कहा कि धार्मिक आयोजनों को समाजसेवा से जोड़ना अत्यंत सराहनीय पहल है। इससे समाज में सहयोग, समर्पण और परोपकार की भावना का विकास होता है। ऐसे कार्यक्रम युवाओं को भी भारतीय संस्कृति और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक करते हैं।
जनविश्वास से विकास की यात्रा को मिली नई ऊर्जा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पिछले वर्षों में देश ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आधारभूत संरचना, ग्रामीण विकास, डिजिटल तकनीक, सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। जनता के विश्वास और सहभागिता से विकास की यह यात्रा लगातार आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में भी राष्ट्र निर्माण, गरीब कल्याण, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर सभी ने मिलकर राष्ट्रहित में कार्य करने का संकल्प लिया।
सेवा और जनकल्याण की भावना रहेगी निरंतर जारी
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आयोजकों ने कहा कि सेवा, संस्कार और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भविष्य में भी जारी रहेगी। समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। साथ ही धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को जोड़ने का कार्य भी आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक एकता ही देश की सबसे बड़ी शक्ति है। इसी शक्ति के बल पर भारत विश्व में नई पहचान स्थापित कर रहा है। सभी लोगों ने राष्ट्र की समृद्धि, विकास और जनकल्याण की कामना करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।