ओम प्रकास तिवारी 
मोतिहारी। महात्मा गांधी प्रेक्षा गृह, मोतिहारी में शुक्रवार को जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव की अध्यक्षता में "विकसित भारत–जी राम जी योजनान्तर्गत पंच सम्मेलन" का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी, जिला परिषद अध्यक्षा ममता राय, उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार, सहायक समाहर्ता राज कृष्ण झा, जिला पंचायत राज पदाधिकारी राम जनम पासवान तथा निदेशक, एनईपी डॉ. कुंदन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

सम्मेलन में त्रिस्तरीय पंचायत के जनप्रतिनिधियों, जिनमें जिला परिषद सदस्य, प्रखंड प्रमुख, उप प्रमुख, पंचायत समिति सदस्य एवं मुखिया बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस दौरान वीडियो एवं पीपीटी के माध्यम से विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के अंतर्गत नई ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था के विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी गई।

जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2005 में लागू राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम ने ग्रामीण परिवारों को पहली बार रोजगार का कानूनी अधिकार दिया। पिछले दो दशकों में मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आधारभूत संरचना के विकास तथा प्रवासी श्रमिकों को आजीविका उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि नई ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, तालाब-पोखरों का जीर्णोद्धार, पौधारोपण, खेल मैदान, विद्यालयों की आधारभूत संरचना एवं अन्य टिकाऊ जनोपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। यह नई व्यवस्था पूर्व की योजनाओं का विकल्प नहीं बल्कि उन्हें अधिक प्रभावी एवं आधुनिक स्वरूप देने का प्रयास है।

डीएम ने बताया कि नए अधिनियम में ग्रामीण अधोसंरचना विकास, जल संरक्षण, आजीविका, कौशल विकास तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में ग्रामीण विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।

उन्होंने जानकारी दी कि कृषि कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए 60 दिनों का "लीन पीरियड" निर्धारित किया गया है तथा रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। इससे ग्रामीण श्रमिकों को अधिक रोजगार मिलेगा और खेती के मौसम में श्रमिकों की उपलब्धता भी बनी रहेगी।

जिलाधिकारी ने सभी जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार तक समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पहुंचाना सुनिश्चित करें तथा नए अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं।

कार्यक्रम में निदेशक एनईपी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, कार्यपालक अभियंता तथा ढाका, कल्याणपुर, घोड़ासहन, चिरैया एवं केसरिया के कार्यक्रम पदाधिकारियों ने विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम के विभिन्न पहलुओं एवं इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ पंच सम्मेलन का समापन हुआ।