दिल्ली : राजधानी के नांगलोई-नजफगढ़ इलाके में ड्रेन निर्माण कार्य का उद्घाटन आज दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने किया, जिससे क्षेत्र में जलभराव और मानसून के समय होने वाली बाढ़ जैसी समस्याओं को स्थायी रूप से हल करने की उम्मीद है। यह परियोजना दिल्ली सरकार के ड्रेनेज मास्टर प्लान का हिस्सा है, जो पूरे शहर में बेहतर जल निकासी व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उद्घाटन के दौरान कहा कि शहर के उत्तरी-पश्चिमी हिस्सों में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई थी, खास कर नांगलोई, किराड़ी, मुंडका और बावना जैसे इलाकों में, जहां भारी बारिश के दौरान सड़कें और आवासीय इलाके पानी में डूब जाते थे। नई ड्रेन और संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण से इन समस्याओं को जड़ से खत्म करने की योजना है।
यह ड्रेन निर्माण कार्य आईrrigation and Flood Control Department द्वारा जारी ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिक रूप से डिज़ाइन किये गए बड़े ट्रंक ड्रेनों का निर्माण शामिल है ताकि वर्षा जल को तेज़ी से संचालित किया जा सके और जलजमाव की घटनाएँ कम हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के लागू होने से जलभराव से जुड़ी असुविधाएँ समाप्त होंगी और नागरिकों को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिलेगा।
सरकार ने बताया है कि इस परियोजना के तहत अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी हो रहे हैं, जिनमें रोहतक रोड (NH-10) के किनारे ड्रेन की मरम्मत और निर्माण शामिल है, जोकि नांगलोई से हायरोढ़ तक फैले हुए क्षेत्र की जलनिकासी क्षमता को बेहतर बनाएगा। यह काम मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
रेखा गुप्ता ने कहा कि शहर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक और टिकाऊ बनाने का यह एक कदम है, ताकि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का बेहतर सामना किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यह ड्रेनेज मास्टर प्लान दिल्ली को उसके भौगोलिक और जलवायु के हिसाब से तैयार किया गया है ताकि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जनसंख्या दबाव के बावजूद पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सके।
नांगलोई-नजफगढ़ क्षेत्र में यह ड्रेन निर्माण परियोजना स्थानीय निवासियों के लिए खास महत्व रखती है क्योंकि यहां मानसून के दौरान अक्सर सड़कों और घरों में पानी भर जाता है जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के बड़े ट्रंक ड्रेन परियोजनाओं के पूरा होने से इन इलाकों में स्थाई राहत मिलेगी और नागरिकों को मौसम-आधारित परेशानियों से मुक्ति मिलेगी।