नई दिल्ली/कोलंबो: भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी आज (7 जनवरी 2026) से दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका पहुंचे हैं, जहाँ वे अपने समकक्षों और उच्च सैन्य और सिविल नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच दोनों पक्षों के बीच रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से की जा रही है।
जनरल द्विवेदी की यह यात्रा भारतीय रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक घोषणा के अनुसार भारत–श्रीलंका सैन्य संबंधों को गहरा करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। वे श्रीलंका में सीनियर मिलिट्री और सिविल अधिकारियों से मिलेंगे, जिसमें श्रीलंका सेना प्रमुख, रक्षा सचिव और रक्षा उप-मंत्री शामिल हैं। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच प्रशिक्षण सहयोग, क्षमता निर्माण और क्षेत्रीय सुरक्षा पर बातचीत जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
द्विवेदी पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के द्वितीय दौरे पर थे, जहाँ उन्होंने यूएई की सेना के शीर्ष कमांडर से व्यापक सुरक्षा और सैन्य सहयोग पर वार्ता की। यूएई दौरे के समापन के बाद वे सीधे श्रीलंका के लिए आये हैं, जो भारत–श्रीलंका रक्षा रिश्तों को और मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
श्रीलंका दौरे के दौरान सेना प्रमुख द्वारा डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज में संबोधन, आर्मी वार कॉलेज, बु्टाला के अधिकारियों और प्रशिक्षुओं से बातचीत, तथा आईपीकेएफ (इंडियन पीसकीपिंग फोर्स) वॉर मैमोरियल पर श्रद्धांजलि देना भी कार्यक्रमों में शामिल है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों मित्र देशों के बीच सैन्य कूटनीति को और अधिक प्रभावी बनाना और साझा सुरक्षा हितों का दोबारा पुष्टि करना है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी, क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, और प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग जैसे मुद्दों पर ठोस समझौतों और सहयोग प्रस्तावों पर भी विचार हो सकता है। श्रीलंका में भारत की निरंतर भागीदारी भारतीय महासागर क्षेत्र में स्थिरता और रक्षा सहयोग को प्रमुख रूप से बढ़ावा देती है।
यह दौरा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयासों और द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को लेकर लगातार संवाद जारी है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच मजबूत तालमेल से हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और साझा हितों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।