माघ गुप्त नवरात्रि 2026: आज से शुरू हुई माघ गुप्त नवरात्रि , जानें कलश स्थापना मुहूर्त, शुभ योग और पूजा विधि
नई दिल्ली: माघ मास की गुप्त नवरात्रि इस बार 19 जनवरी 2026 से 27 जनवरी 2026 तक चलेगी। सोमवार 19 जनवरी को कलश स्थापना के साथ ही दस महाविद्याओं की पूजा आरंभ हो जाएगी। गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि से अलग मानी जाती है क्योंकि इसमें दिखावे की जगह गुप्त साधना, मंत्र-जप, ध्यान और आत्मिक उन्नति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
गुप्त नवरात्रि 2026 कलश स्थापना मुहूर्त
दिनांक: 19 जनवरी 2026 (सोमवार)
सुबह का शुभ मुहूर्त: 06:41 AM से 08:01 AM
अभिजीत मुहूर्त: 11:39 AM से 12:22 PM
विजय मुहूर्त: 01:48 PM से 02:30 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:00 AM से 05:51 AM
अशुभ समय:
राहुकाल: 08:01 AM से 09:21 AM
गुलिक काल: 01:20 PM से 02:40 PM
यमगण्ड: 10:41 AM से 12:00 PM
गुप्त नवरात्रि 2026 शुभ योग
कलश स्थापना के समय सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। यह योग सुबह 11:52 AM से अगले दिन सुबह 7:14 AM तक रहेगा। इस योग में मां दुर्गा की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और परेशानियों से राहत मिलती है।
गुप्त नवरात्रि में पूजा के साथ-साथ एकांत साधना, मंत्र-जप और ध्यान को विशेष महत्व दिया गया है।
गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि में मन और श्रद्धा से देवी की उपासना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लंबे समय से रुके कामों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। यह पर्व रहस्यमय और गहरा माना जाता है, क्योंकि इसमें पूजा-पाठ पूर्ण एकाग्रता और संयम के साथ किया जाता है।
गुप्त नवरात्रि में 10 महाविद्याओं की पूजा
पहला दिन: मां काली
दूसरा दिन: मां तारा
तीसरा दिन: मां त्रिपुरसुंदरी
चौथा दिन: मां भुवनेश्वरी
पाँचवां दिन: मां छिन्नमस्तिका
छठा दिन: मां त्रिपुर भैरवी
सातवां दिन: मां धूमावती
आठवां दिन: मां बगलामुखी
नौवां दिन: मां मातंगी
दसवां दिन: मां कमला
इन दिनों उपवास, संयम और नियमों का पालन करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है।
गुप्त नवरात्रि पूजा विधि
ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प करें।
पूजा चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर देवी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
कलश में स्वच्छ जल भरें, सुपारी, सिक्का और आम के पत्ते डालें।
कलश के ऊपर नारियल स्थापित करें और इसे देवी शक्ति का प्रतीक मानें।
शांत मन से ध्यान और मंत्र-जप करें।
देवी को अक्षत, पुष्प, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
पूजा के अंत में आरती करें और वातावरण को भक्तिमय बनाएं।
किसी भूल-चूक के लिए मां से क्षमा याचना करें।
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