राजु मंडल /रफ्तार मीडिया सवाददाता/ गांडेय

गांडेय प्रखंड अंतर्गत बदगुण्दा पंचायत के लुकाईया गांव में एस.के. संथाल जुवान गांवता के बैनर तले अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत लुकाईया जाहेर थान परिसर में अतिथियों द्वारा पौधारोपण और दीप प्रज्वलित कर की गई। इसके साथ ही पंडरी पंचायत के पंदना में भी सागेन साकान नवयुवक समिति के बैनर तले परगनैत सुखदेव हांसदा के नेतृत्व में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।
​मुख्य वक्तायों के रूप में उपस्थित जेएमएम जिला सचिव सह आदिवासी समाज के नेता महालाल सोरेन ने कहा कि आदिवासियों का संघर्ष से नाता सदियों पुराना है। सिंधु सभ्यता से लेकर आज तक समाज ने अपने अस्तित्व, जल-जंगल-जमीन की रक्षा (1855-56) और महाजनी प्रथा के खिलाफ (1973 से दिसोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में) लड़ाइयां लड़कर अपने अधिकार हासिल किए हैं।
​उन्होंने युवाओं से अपील की.कि वे झारखंड सरकार की कल्याणकारी योजनाओं (जैसे मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना) का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। साथ ही जोर देकर कहा कि समाज का विकास केवल शिक्षा से ही संभव है, इसलिए हर बच्चे को स्कूल जरूर भेजें।
जिला परिषद सदस्या हिंगामुनी मुर्मू ने कहा कि समाज के विकास के लिए महिलाओं का आगे आना अनिवार्य है। उन्होंने आदिवासी समाज में नशाखोरी को नासूर बताते हुए इसके खिलाफ सुनियोजित तरीके से जागरूकता फैलाने की अपील की।
​युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए इस अवसर पर एक फुटबॉल प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विजेता टीमों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में ​बदगुण्दा के पराणिक सह झामुमो प्रखंड अध्यक्ष चांदमाल मरांडी,​लो बीर बैसी के परगनैत महालाल हेम्ब्रम,​कोरबंधा बैसी के परगनैत सुखदेव किसकू,
​ओझाडीह बैसी के परगनैत प्रदीप मुर्मू,​बड़कीटांड़ बैसी के परगनैत रुबीलाल मुर्मू,​रानीटांड़ बैसी के परगनैत जितलाल मरांडी,​जोरासिमर बैसी के परगनैत लगन हेम्ब्रम,​बरमसिया-1 बैसी के परगनैत अजीत सोरेन,​चेंगेरबाद बैसी के परगनैत दुबेस सोरेन,
​मेदनीसारे बैसी के परगनैत मुलीन मुर्मू,​ग्राम प्रधानगण: दर्शन बास्के, सोनानालाल मुर्मू देवीलाल बास्के, 
​बालेश्वर हांसदा, पोरेश बास्के, दशरथ हांसदा,जुवान गांवता, विनोद हांसदा ​मंच का संचालन देवचंद बास्के और विश्वनाथ बास्के ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सुदाम बास्के, मनोज मुर्मू, गोविंद हांसदा, दिलीप बास्के और नरेश हांसदा का सराहनीय योगदान रहा।