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मुरादाबाद में Kumar Vishwas का Shankaracharya विवाद पर बयान: “सात्विक क्रोध त्यागें और सब पर आशीर्वाद बरसाएं”

मुरादाबाद पहुँचे कवि और विचारक कुमार विश्वास ने शंकराचार्य विवाद पर बात करते हुए कहा कि दो पक्ष हैं और मेरी इतनी सामर्थ्य नहीं कि मैं कोई टिप्पणी कर सकूं। एक सामान्य आस्तिक होने के नाते, मैं केवल यही कह सकता हूँ कि प्रशासन को संवेदनशीलता से काम करना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जो भी व्यक्ति संत प्रवृति का है, जिसका शरीर भगवा धारण करता है, और जो धर्म और संस्कृति के लिए समर्पित है, उनसे संवाद करते समय मर्यादा और जिम्मेदारी का भाव रखना चाहिए।

कुमार विश्वास ने पूज्य शंकराचार्य जी से भी प्रार्थना की कि वे अपना सात्विक क्रोध त्यागें और सब पर कृपा बरसाएं। उनका कहना था कि उनकी परंपरा के कारण ही धर्म का मान बढ़ा है। यदि कोई अपराध हुआ है, तो हम भारत के नागरिक होने के नाते क्षमा प्रार्थना करते हैं और चाहते हैं कि उनका आशीर्वाद सबके मंगल के लिए बरसाए।


कुमार विश्वास ने एम.के. स्टालिन द्वारा हिंदी भाषा पर दिए गए बयान पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि जिनके पूज्य पिताजी का नाम भगवान राम के नाम के पर्यायवाची करुणानिधि हो, और उनके पुत्र भगवान राम की भाषा के बारे में ऐसी बातें करें, यह शोभनीय नहीं है और दुख का कारण बनता है।

उन्होंने कहा कि तमिल एक अद्भुत भाषा है और उसका प्रचार-प्रसार होना चाहिए, लेकिन किसी एक भाषा का विरोध नहीं होना चाहिए। यह एक राजनीतिक कौशल का विषय है। 1947 के बाद इस देश में भाषा को लेकर कई बीज बोए गए हैं, और आज कुछ लोग इसे जानबूझकर भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली के नेताओं ने कहा कि हिंदी किसी पर थोपी नहीं जाएगी, कुमार विश्वास मुरादाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुँचे।

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