राजू मंडल, रफ्तार मीडिया सवाददाता गांडेय
एक तरफ देश और राज्य तकनीकी विकास तथा डिजिटल इंडिया के दावे कर रहे हैं, वहीं गांडेय प्रखंड के बुधुडीह पंचायत अंतर्गत गुडीयाडीह गांव के बाशिंदे आज भी बुनियादी जरूरतों और आवागमन के एक अदद रास्ते के लिए तरस रहे हैं। सड़क और मूलभूत सुविधाओं के घोर अभाव से आजिज आ चुके ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया और उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोलते हुए 'रोड नहीं तो वोट नहीं' का जोरदार नारा बुलंद किया।
*पगडंडियों के सहारे जीवन जीने को विवश ग्रामीण*
गुडीयाडीह गांव में आज तक आने-जाने के लिए कोई पक्की सड़क या सुगम मार्ग नहीं बन पाया है। स्थिति इतनी दयनीय है कि ग्रामीण आज भी तंग और संकरी पगडंदियों के सहारे ही अपनी रोजमर्रा की जिंदगी गुजारने को विवश हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग द्वारा रास्ते में ट्रंच (बड़ी खाई) काट दिए जाने के कारण गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क चारों तरफ से पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। इस अड़ंगे के बाद से ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
*खटिया ही एकमात्र सहारा,स्वास्थ्य और शिक्षा बदहाल*
सड़क और रास्ते के अभाव में इस गांव के लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में अकल्पनीय पीड़ा झेलनी पड़ रही है,
गांव में किसी के बीमार पड़ने या प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तो दूर, वाहन तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। ऐसी स्थिति में मरीजों को खटिया पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक ढोना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है।
सड़क न होने के कारण छोटे-छोटे बच्चों को रोजाना स्कूल जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
वहीं जेएमएम नेता प्रमोद राम ने कहा है की गुड़ियाडीह में रस्ता का आभाव है स्थानीय प्रतिनिधियों को पहल करके ग्रामीणों के लिए रास्ता बनवाने की जरूरत है।
*लोकतंत्र के महापर्व में बाधा*
ग्रामीणों का कहना है कि मतदान के दौरान बूथ तक पहुंचने के लिए भी उन्हें लंबी और दुर्गम दूरियां तय करनी पड़ती हैं।
बुनियादी सुविधाओं की लंबे समय से हो रही लगातार अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने एकजुट होकर तीखा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सड़क की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक वे आगामी चुनावों में मताधिकार का बहिष्कार करेंगे।
इस जोरदार विरोध प्रदर्शन में गोपाल दास, तुलसीदास, टहलू दास, भीखनी देवी, पार्वती देवी, मीना देवी, बजरंगी दास, युगन दास, मंटू दास, आरती देवी, मंजू देवी, किशुन कोल, भारत टुडू, कमलेश टुडू, टिंकू कुमार, दामोदर कुमार, इतवारी दास और घनश्याम दास समेत दर्जनों की संख्या में ग्रामीण शामिल रहे।