बंध्याकरण ऑपरेशन के दौरान महिला की मौत
बगहा/मोहम्मद इम्तियाज:
बगहा से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां सेमरा रेफरल अस्पताल में बंध्याकरण ऑपरेशन के दौरान एक महिला की मौत के बाद इलाके में भारी बवाल मच गया है। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बगहा–सेमरा मुख्य सड़क को जाम कर घंटों प्रदर्शन किया। यह मामला एक बार फिर ग्रामीण इलाकों की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित चिकित्सकीय लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जानकारी के अनुसार, सेमरा थाना क्षेत्र के डढ़ीया गांव निवासी रामजी उरांव की पत्नी केवन्ति देवी का बंध्याकरण ऑपरेशन सेमरा रेफरल अस्पताल में किया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले आवश्यक जांच रिपोर्ट देखे बिना ही प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जबकि महिला में खून की कमी थी। ऑपरेशन के दौरान ही उसकी हालत बिगड़ने लगी, लेकिन समय रहते न तो समुचित इलाज मिला और न ही एम्बुलेंस की व्यवस्था हो सकी। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा और एम्बुलेंस उपलब्ध होती, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।
महिला की मौत की खबर फैलते ही ग्रामीण भड़क उठे और सड़क जाम कर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दोषी चिकित्सकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए। सड़क जाम की सूचना मिलते ही बगहा-2 सिधाव के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश सिंह नीरज, रामनगर एसडीपीओ रागिनी कुमारी और एसडीएम चांदनी कुमारी मौके पर पहुंचीं और आक्रोशित लोगों को समझाने-बुझाने में जुटीं।
इधर, बगहा अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बंध्याकरण एक माइनर ऑपरेशन है और मौत का कारण कुछ और हो सकता है, महिला अनुमंडल अस्पताल में मृत अवस्था में लाई गई थी। वहीं, वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को हटाने की मांग करते हुए सिविल सर्जन से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका आरोप है कि सेमरा रेफरल अस्पताल में करोड़ों की लागत से भवन तो बन गया, लेकिन आज तक नियमित स्टाफ और संसाधनों की तैनाती नहीं हो सकी, जिसकी चेतावनी वे कई बार दे चुके हैं।
फिलहाल इलाके में तनाव का माहौल है और प्रशासन हालात को सामान्य करने की कोशिश में जुटा है। सवाल यही है कि आखिर कब सुधरेगी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और कब तक आम लोगों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।
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