राजु मंडल रफ्तार मीडिया सवाददाता/ गांडेय

गांडेय प्रखंड क्षेत्र में 108 एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह चरमरा गई है।
​मेंटेनेंस के अभाव में कबाड़ बन रहे वाहन, अधिकांश एम्बुलेंस लंबे समय से निष्क्रिय गांडेय के धोबीयामोड स्थित गैरेज में खड़ी हैं।
​नेताओं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है,सरकार और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के खिलाफ आम जनता में उबाल सामने या रही है।

झारखंड सरकार द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लाख दावे किए जा रहे हों, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। गांडेय प्रखंड क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ मानी जाने वाली बहुचर्चित 108 एम्बुलेंस सेवा इन दिनों पूरी तरह से लचर और बदहाल व्यवस्था की शिकार हो चुकी है। हालात इतने बदतर हैं कि समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध न होने के कारण सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल लोगों और प्रसूताओं को मजबूरन निजी वाहनों या टोटो का सहारा लेना पड़ रहा है।

*​दम तोड़ रहा है सेवा का मूल उद्देश्य*

​जिस मुख्य उद्देश्य के साथ सरकार ने इस आपातकालीन सेवा की शुरुआत की थी—ताकि एक कॉल पर कुछ ही मिनटों में एम्बुलेंस जरूरतमंद के द्वार पर पहुंचे—वह आज प्रशासनिक सुस्ती और अधिकारियों की लापरवाही के चलते दम तोड़ रहा है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों का आरोप है कि मौजूदा सरकार और स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण अधिकांश 108 एम्बुलेंस मेंटेनेंस के अभाव में या तो गैरेज की शोभा बढ़ा रही हैं या फिर कबाड़ में तब्दील हो रही हैं। समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण कई बार घायलों को रास्ते में ही दम तोड़ना पड़ता है।

*​जिम्मेदारों पर बरसे राजनीतिक दल*

​इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर अब राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस लचर व्यवस्था को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लिया है।
​वहीं भाजपा नेता संदीप कुमार वर्मा ने वर्तमान झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब से यह सरकार सत्ता में आई है, तब से स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। एम्बुलेंस सेवाएं कागजों पर दौड़ रही हैं और धरातल पर सभी वाहन गैरेज में धूल फांक रहे हैं। इस लचर व्यवस्था के कारण आम जनता पिस रही है, लेकिन सरकार और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
फारवर्ड ब्लाक के नेता राजेश यादव ने मौजूदा सरकार और प्रशासनिक उदासीनता पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने आंकड़ों की पोल खोलते हुए कहा कि पूरे जिले में संचालित 108 एम्बुलेंस के 37 वाहनों में से आधे से अधिक वाहन जर्जर और खराब अवस्था में खड़े हैं।साथ ही एंबुलेंस चालकों का मानदेय भुगतान में विलम बी किया गया है,उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए सरकार से मांग की है कि इन सभी निष्क्रिय वाहनों की तत्काल मरम्मत कराई जाए और एम्बुलेंस सेवा को युद्ध स्तर पर सुचारू किया जाए, ताकि समय पर इलाज न मिलने से होने वाली मौतों के आंकड़ों में कमी लाई जा सके।

*​जनता की हुंकार जल्द नहीं सुधरे हालात तो होगा उग्र आंदोलन*

​गांडेय क्षेत्र की जनता और विभिन्न संगठनों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इस गंभीर समस्या पर त्वरित संज्ञान नहीं लिया और पूर्व की भांति इस सेवा को पूरी सक्रियता से बहाल नहीं किया, तो विवश होकर आम जनता और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। जनता का सवाल साफ है—क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है, तभी इस लचर व्यवस्था की सुध ली जाएगी।