रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं (Alleged Irregularities) को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची में अभ्यर्थियों का प्रदर्शन (Protest) बुधवार को 12वें दिन भी जारी रहा। इस बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन (Hunger Strike) के तीसरे दिन भी डटे रहे। उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आने के बाद आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र, अभिभावक और सामाजिक संगठनों के लोग समर्थन में पहुंचे।

उधर मामले की जांच कर रही CID (Crime Investigation Department) ने कार्रवाई (Action) तेज करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 14 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया (Examination Process) से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है।

CID ने जिन तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार शामिल हैं। एजेंसी के अनुसार इन पर परीक्षा संचालन (Exam Management) को प्रभावित करने के आरोप हैं। वहीं 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Examination) मामले में आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते से भी कई चरणों में लंबी पूछताछ की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि उनसे चौथी बार करीब सात घंटे तक पूछताछ की गई।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि 14वीं JPSC पीटी (Preliminary Test) का परिणाम घोषित होने के बाद से ही अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए थे। उन्होंने बताया कि आंदोलन की शुरुआत जुलाई की शुरुआत में हुई थी और इसके बाद राज्यपाल (Governor) तथा मुख्यमंत्री (Chief Minister) को भी ज्ञापन और साक्ष्य सौंपे गए। उनका दावा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम तथ्य सामने आए हैं।

वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे को पूरी गंभीरता (Seriousness) से देख रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी मामले का निष्पक्ष समाधान (Fair Resolution) सुनिश्चित करना है और जांच रिपोर्ट (Investigation Report) आने के बाद आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।

JPSC परीक्षा विवाद अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर (National Level) पर भी चर्चा का विषय बन चुका है। अभ्यर्थी पारदर्शी जांच (Transparent Investigation), दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली (Fair Recruitment System) की मांग पर अड़े हुए हैं।