उलेमाओं ने स्वास्थ्य मंत्री से संयमित भाषा के प्रयोग की मांग की, माफी नहीं मिली तो आंदोलन की चेतावनी
जामताड़ा।
झारखंड राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सह जामताड़ा कांग्रेस पार्टी के विधायक डॉ. इरफान अंसारी द्वारा हाल ही में एक मदरसा के शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए कथित विवादित बयान को लेकर जिले के मुस्लिम धर्मगुरुओं में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। इस बयान को उलेमाओं ने अपमानजनक और निराधार बताते हुए कड़ी निंदा की है।बुधवार को नेशनल ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस मूवमेंट के जिला कार्यालय में जिले के विभिन्न मदरसों से आए उलेमाओं और मौलानाओं की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वसम्मति से स्वास्थ्य मंत्री के बयान की निंदा की गई और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई। उलेमाओं ने कहा कि बार-बार धार्मिक शिक्षकों और हाफिजों की बेइज्जती किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में हाफिज एहतेशामुल मिर्जा ने जामताड़ा थाना में स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराने के लिए आवेदन भी दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार हैं, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। बैठक को संबोधित करते हुए मौलाना सलीम केशर ने कहा कि उलेमा समाज में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं और उनकी बातों को आवाम मानती है। ऐसे में किसी जनप्रतिनिधि द्वारा घमंड में आकर उलेमाओं का अपमान करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मंत्री से उलेमाओं के प्रति सम्मान और मोहब्बत का व्यवहार करने की अपील की।उलेमाओं ने चेतावनी दी कि यदि स्वास्थ्य मंत्री ने अपने बयान पर माफी नहीं मांगी और भविष्य में इस तरह की भाषा का प्रयोग दोबारा किया गया, तो जिले भर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।बैठक में मौलाना शमसुल, मौलाना अब्दुल सत्तार, मौलाना राजाउद्दीन, मौलाना जलालुद्दीन, मौलाना रशीद, मौलाना हारून, मौलाना मुख्तार, मौलाना इरशाद, मौलाना जसीम, मौलाना मसूद, मुफ्ती सिद्दीकी, मुस्तकीम और ताहिर सहित बड़ी संख्या में इस्लामिक धर्मगुरु उपस्थित थे।
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