आषाढ़ शुक्ल पक्ष के द्वितीया यानि 7 जुलाई को भगवान जगन्नाथ रथ पर सवार होकर भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे. बेमेतरा में भी रथयात्रा की तैयारी जगन्नाथ मंदिर समिति द्वारा पिछले 10 दिनों से की जा रही है. कोलकाता व स्थानीय कारीगर हर साल सरई की लकड़ी से रथ को तैयार कर रहे हैं. यह परंपरा दस वर्षों से चली आ रही है. हर साल रथ यात्रा समिति द्वारा रथयात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था भी की गई है. महाप्रभु अपने बड़े भाई और बहन के साथ शहर भ्रमण करते हुए मौसी के घर राम-जानकी मंदिर पहुंचेंगे. वहां एकादशी तक आराम करने के बाद बहुड़ा जात्रा के दिन अपने स्थान पर लौट आएंगे. भगवान के रथ को श्रद्धालुओं द्वारा खींचा जाता हैं. ऐसी मान्यता है कि रथ खींचने वालों को कई यज्ञों का फल मिलता है. रथयात्रा का दर्शन करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि रथ को खींचने के लिए शहर के सैंकड़ों लोग शामिल होते हैं.