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अस्पताल में बंध्याकरण के दौरान आदिवासी महिला की मौत, SDM जांच में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी दोषी पाए गए

 


पश्चिम चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल अंतर्गत सेमरा रेफरल अस्पताल में बंध्याकरण ऑपरेशन के दौरान एक आदिवासी महिला की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बुधवार को बंध्याकरण के दौरान आदिवासी महिला केवन्ति देवी की मौत के बाद अस्पताल परिसर में शव के साथ घंटों हंगामा हुआ। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप था कि घोर लापरवाही के कारण महिला की जान गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बगहा की एसडीएम चांदनी कुमारी स्वयं सेमरा रेफरल अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने मृतका के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और पूरे मामले की जांच की। जांच के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश सिंह नीरज को दोषी पाया गया। एसडीएम की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि डॉ. राजेश सिंह नीरज द्वारा अस्पताल का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा था और रेफरल अस्पताल को अनाधिकृत कर्मियों के भरोसे छोड़ दिया गया था।
एसडीएम ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से मृतका के परिजनों को तत्काल 50 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई। वहीं, शव के साथ हंगामा कर रहे लोगों को समझा-बुझाकर स्थिति को शांत कराया गया।
इस पूरे मामले को लेकर वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सदन में सेमरा रेफरल अस्पताल के चिकित्सक और प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग उठाई। विधायक का कहना है कि वे पहले भी पीएचसी प्रभारी पर लगातार अनियमितताओं के आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसका नतीजा आज एक आदिवासी महिला की जान जाने के रूप में सामने आया।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि जांच में दोषी पाए गए पीएचसी प्रभारी को तुरंत हटाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी कोई अप्रिय घटना दोबारा न हो।

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