धनबाद:धनबाद जिले के टुंडी अंचल से एक ऐसी खबर आई है जिसने इंसानियत और प्रशासन, दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ हम वन्यजीव संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, तो दूसरी तरफ टुंडी के भूरसाबांध के पास एक घायल हिरण अस्पताल और इलाज के अभाव में दम तोड़ देता है। यह मौत नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की लापरवाही से हुई 'हत्या' है।
घटना का पूरा सच
सड़क हादसा: भूरसाबांध के समीप एक तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से मासूम हिरण गंभीर रूप से घायल हो गया।
घायल हिरण को जब पशु अस्पताल ले जाया गया, तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
लापरवाही की इंतहा: घंटों तड़पने के बाद भी उसे प्राथमिक उपचार तक नसीब नहीं हुआ।
मूकदर्शक बना विभाग: सूत्रों के अनुसार, वन विभाग का कार्यालय पास में ही है, लेकिन सूचना मिलने के बाद भी कोई अधिकारी सुध लेने नहीं पहुँचा।
प्रशासन से सीधे सवाल
पशु चिकित्सालय में डॉक्टर क्यों नहीं थे? क्या अस्पताल सिर्फ कागजों पर चल रहे हैं?
वन विभाग की संवेदनशीलता कहाँ मर गई? पास में कार्यालय होने के बावजूद टीम समय पर क्यों नहीं पहुँची?
वन्यजीवों की सुरक्षा का बजट कहाँ जा रहा है? जब इमरजेंसी में एक घायल जानवर को एम्बुलेंस या डॉक्टर नहीं मिल सकता।
जनता की आवाज
यह घटना टुंडी के वन विभाग और पशु चिकित्सा विभाग के माथे पर कलंक है। ग्रामीणों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इलाज मिल जाता, तो उस बेजुबान की जान बचाई जा सकती थी। क्या प्रशासन इन लापरवाह अधिकारियों पर कोई कड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर एक और मौत को फाइलों में दबा दिया जाएगा?

धनबाद रफ्तार मीडिया संवाददाता गोवर्धन रजक की रिपोर्ट।