आशीष कुमार मुखर्जी/ मांडू: उपायुक्त रामगढ़ के सख्त निर्देशों के बावजूद मांडू प्रखंड में आयोजित विशेष राजस्व शिविर महज खानापूर्ति बनकर रह गया। ग्रामीणों के दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और वर्षों से लंबित राजस्व मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए लगाए गए इस शिविर को लेकर
जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सूचना के अभाव और अधिकारियों की मनमानी के कारण यह शिविर पूरी तरह 'फ्लॉप' साबित हुआ।
*सूचना का अभाव और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी*
18 अप्रैल को समापन के अवसर पर योजना के अनुसार जनप्रतिनिधियों के हाथों ग्रामीणों को 'शुद्धि पत्र' सौंपा जाना था। परंतु, क्षेत्र के जिला परिषद सदस्यों, प्रमुख, उप-प्रमुख और मुखिया संघ के अध्यक्ष तक को इस शिविर की औपचारिक जानकारी नहीं दी गई। कुजू पश्चिमी मुखिया जय कुमार ओझा ने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा, "अंचलाधिकारी द्वारा ज्ञापन तो निकाला गया, लेकिन इसे गुप्त रखा गया। जनप्रतिनिधियों को सूचना न देना भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। केवल अपने चुनिंदा लोगों को ही जानकारी दी गई।"
*अधिकारियों का दावा: 70% मामलों का हुआ निष्पादन*
शिविर के दौरान अंचलाधिकारी (CO) श्रीमती तृप्ति विजया कुजूर अनुपस्थित रहीं। उनकी अनुपस्थिति में कार्यभार संभाल रहे उच्च वर्गीय लिपिक उमेश प्रसाद साहू ने बताया कि 15 से 18 अप्रैल के बीच प्राप्त आवेदनों में से 70% का निष्पादन कर दिया गया है। हालांकि, ग्रामीणों की कम उपस्थिति इस दावे पर सवाल खड़े कर रही है।
*व्यवस्था सुधार की मांग*
जिला परिषद सदस्य (मांडू भाग-3) दयामन्ती देवी ने इस अव्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मांडू अंचल में व्यवस्था बदलने की सख्त जरूरत है। उन्होंने कहा, "जब हमें ही जानकारी नहीं होगी, तो हम गरीब जनता को इसका लाभ कैसे दिला पाएंगे?"
इस दौरान मुख्य रूप से उच्च वर्गीगीय लिपिक उमेश प्रसाद, शुभम कुमार, राजस्व उपनिरीक्षक शंभू नाथ मिश्रा,राजस्व उपनिरीक्षक कन्हैया कुमार, अंचल अमीन शशि भूषण, कुजू पश्चिमी मुखिया मुखिया जयकुमार ओझा, मांडू डीह मुखिया बैद्यनाथ राम और पंचायत समिति सदस्य मनोज कुमार उपस्थित थे।