ओमप्रकाश तिवारी / मोतिहारी। पूर्वी चंपारण
पूर्वी चंपारण के मधुबन विधानसभा क्षेत्र से विधायक राणा रणधीर सिंह ने क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या मधुबनी घाट के भीषण जाम को लेकर बड़ी पहल की है। विधायक ने पटना में बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री शैलेंद्र कुमार से शिष्टाचार भेंट कर मोतिहारी-भाया मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
विधायक राणा रणधीर सिंह की इस पहल के बाद क्षेत्रवासियों को उम्मीद जगी है कि वर्षों से झेल रहे जाम और दुर्घटनाओं से अब जल्द राहत मिलेगी। मंत्री से मुलाकात के दौरान विधायक ने कहा कि "मधुबनी घाट पूर्वी चंपारण का लाइफलाइन है, लेकिन संकरी सड़क और भारी वाहनों के दबाव से रोजाना घंटों जाम लगता है। मरीज, छात्र, व्यापारी सभी परेशान हैं।"
*मंत्री से क्या हुई बात?*
पथ निर्माण विभाग, बिहार सरकार के कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान विधायक राणा रणधीर सिंह ने मंत्री शैलेंद्र कुमार को पूरे क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, ट्रैफिक लोड और दुर्घटनाओं का आंकड़ा विस्तार से बताया। उन्होंने ज्ञापन में मांग की कि मोतिहारी से भाया होते हुए मधुबन तक जाने वाली मुख्य सड़क को 4-लेन में तब्दील किया जाए। खासकर मधुबनी घाट के पास वैकल्पिक बाईपास या फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया।
मंत्री शैलेंद्र कुमार ने विधायक की बात को गंभीरता से सुना और अधिकारियों को तत्काल तकनीकी सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि "जनता की सुविधा सर्वोपरि है। मोतिहारी नेपाल बॉर्डर से जुड़ा इलाका है, यहां ट्रैफिक दबाव स्वाभाविक है। विधायक जी ने सही मुद्दा उठाया है, विभाग इस पर प्राथमिकता से काम करेगा।"
*मधुबनी घाट: मौत का जाम*
स्थानीय लोगों के अनुसार मधुबनी घाट पिछले 10 सालों से पूर्वी चंपारण की सबसे बड़ी ट्रैफिक समस्या बना हुआ है। नेपाल से आने वाले भारी ट्रक, बालू-गिट्टी लदे डंपर, बसें और स्थानीय वाहन सभी इसी एक लेन सड़क से गुजरते हैं। सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक जाम आम बात है।
1. *मरीजों की मौत*: सदर अस्पताल मोतिहारी जाने वाले मरीज एंबुलेंस में ही दम तोड़ देते हैं। 3 किमी का रास्ता 2 घंटे में पार होता है।
2. *स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित*: मधुबन, घोड़ासहन, भाया के हजारों बच्चे स्कूल-कॉलेज समय पर नहीं पहुंच पाते।
3. *आर्थिक नुकसान*: सब्जी, दूध, फल लेकर जाने वाले किसान और व्यापारी रोजाना लाखों का नुकसान झेल रहे हैं।
4. *दुर्घटनाएं*: संकरी मोड़ और ओवरलोडिंग के कारण हर महीने 2-4 मौतें होना आम हो गया है।
स्थानीय समाजसेवी रामप्रवेश यादव बताते हैं, "पिछले साल मेरी पत्नी का ऑपरेशन था। एंबुलेंस मधुबनी घाट पर 1.5 घंटे फंसी रही। डॉक्टर ने कहा 30 मिनट लेट होने से जान चली जाती।"
*राणा रणधीर सिंह: तेजतर्रार विधायक की छवि*
राणा रणधीर सिंह मधुबन से लगातार विधायक हैं और बिहार के सबसे सक्रिय जनप्रतिनिधियों में गिने जाते हैं। सदन में भी वे क्षेत्र की समस्याओं को सबसे मजबूती से उठाते हैं। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर उनका ट्रैक रिकॉर्ड साफ है।
पिछले साल ही उन्होंने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान मधुबनी घाट का मुद्दा उठाकर सरकार का ध्यान खींचा था। तब पथ निर्माण मंत्री ने जांच का आश्वासन दिया था। अब सीधे मंत्री से मिलकर उन्होंने फाइल आगे बढ़वा दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राणा रणधीर सिंह की यही तेजतर्रारी उन्हें अन्य विधायकों से अलग करती है। वे न सिर्फ समस्या बताते हैं, बल्कि उसका समाधान लेकर अधिकारियों के पास जाते हैं। इसी कारण क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
*ज्ञापन में क्या-क्या मांगे थीं?*
1. मोतिहारी-रक्सौल NH-28A से भाया होते हुए मधुबन तक 4-लेन सड़क का निर्माण
2. मधुबनी घाट पर 500 मीटर लंबा फ्लाईओवर/बाईपास
3. घाट के दोनों ओर सर्विस रोड और फुटपाथ का निर्माण
4. रात्रि में ट्रैफिक नियंत्रण के लिए LED लाइट और CCTV
5. ओवरलोड ट्रकों की जांच के लिए वजन माप केंद्र
विधायक ने मंत्री को बताया कि इस सड़क से रोजाना 15 हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं। नेपाल बॉर्डर, चीनी मिल, गन्ना मंडी और रेलवे स्टेशन से जुड़ाव के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है।
*स्थानीय जनता में खुशी की लहर*
विधायक की पहल की खबर मिलते ही मधुबन, भाया, पताही, क्षेत्र में खुशी है। सोशल मीडिया पर लोग #धन्यवाद_राणा_जी लिखकर बधाई दे रहे हैं।
मधुबन के दुकानदार सुरेंद्र प्रसाद कहते हैं, "10 साल से जाम झेल रहे हैं। अगर 4-लेन बन गई तो हमारा धंधा दोगुना हो जाएगा। राणा जी ने करके दिखाया।"
भाया की पंचायत समिति सदस्य अनीता देवी बोलीं, "महिलाएं मरीज लेकर डरती थीं इस रास्ते से। अब उम्मीद है कि बेटी की शादी में बारात बिना जाम के आएगी।"
*अब आगे क्या?*
पथ निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार मंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों की टीम अगले 15 दिनों में मधुबनी घाट का सर्वे करेगी। DPR बनने के बाद केंद्र सरकार से फंड की मांग होगी क्योंकि यह सड़क नेपाल बॉर्डर को जोड़ती है इसलिए इसे "बॉर्डर रोड" योजना में भी डाला जा सकता है।
विधायक राणा रणधीर सिंह ने कहा, "मैं मंत्री जी का आभारी हूं कि उन्होंने मेरी बात सुनी। अब मेरी जिम्मेदारी है कि फाइल को ट्रैक करूं। जब तक सड़क नहीं बन जाती, मैं चैन से नहीं बैठूंगा। यह मेरी जनता से किया वादा है।"
*तीन बार के विधायक, एक ही मकसद*
राणा रणधीर सिंह तीसरी बार विधायक बने हैं। हर बार उनका फोकस विकास पर रहा है। मधुबन में उनके कार्यकाल में दर्जनों स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन और सड़कें बनी हैं। लेकिन मधुबनी घाट का मुद्दा उनके लिए "ड्रीम प्रोजेक्ट" जैसा है।
वे अक्सर कहते हैं, "विधायक बनना सेवा का मौका है। जनता ने तीन बार विश्वास किया है, अब मैं उस विश्वास को मंत्री पद जैसी उपलब्धि से नहीं, बल्कि सड़क, पानी, बिजली से चुकाऊंगा।"
*विशेषज्ञों की राय*
पटना के ट्रैफिक इंजीनियर डॉ. संजय कुमार के अनुसार, "मधुबनी घाट का जाम तकनीकी रूप से 4-लेन + बाईपास से ही हल होगा। नेपाल बॉर्डर का ट्रैफिक बढ़ेगा ही, इसलिए अभी नहीं तो 5 साल बाद भी यही काम करना पड़ेगा। विधायक ने समय पर कदम उठाया है।"
मोतिहारी-भाया-मधुबन सड़क का चौड़ीकरण सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि 5 लाख लोगों की जिंदगी से जुड़ा सवाल है। विधायक राणा रणधीर सिंह ने जो पहल की है वो दिखाती है कि सच्चा जनप्रतिनिधि वही है जो फोटो खिंचवाने के लिए नहीं, बल्कि फाइल आगे बढ़वाने के लिए मंत्री के दरवाजे तक जाता है।
अब गेंद पथ निर्माण विभाग के पाले में है। अगर DPR जल्दी बनी और टेंडर हुआ, तो 2027 तक पूर्वी चंपारण को मधुबनी घाट के जाम से मुक्ति मिल सकती है। तब तक राणा रणधीर सिंह का संघर्ष जारी रहेगा।