राजु मंडल /गांडेय।गांडेय अंचल क्षेत्र में जमीन विवाद का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। ताजा मामला एक ही जमीन पर दोहरी जमाबंदी कायम कर फर्जी रसीद निर्गत करने से जुड़ा है, जिसे लेकर दो पक्षों में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। प्रशासनिक आदेश (धारा 144) का उल्लंघन करते हुए एक पक्ष द्वारा निर्माण कार्य शुरू किए जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से बचाया और काम को रुकवा दिया।

​मिली जानकारी के अनुसार,गांडेय अंचल के गांडेय के खाता संख्या 3, प्लॉट संख्या 295, 296, और 297 की कुल 18 डिसमिल जमीन पर विवाद चल रहा है। प्रथम पक्ष के रंजीत राम के अनुसार, यह जमीन उनके पूर्वजों—अम्बिका राम, दोरीका राम और चिंतामन राम—के नाम से दर्ज है, जिसकी जमाबंदी काफी समय से कायम है और वे नियमित रूप से लगान रसीद कटाते आ रहे हैं।
​आरोप है कि इसी बीच अंचल कार्यालय की मिलीभगत या फर्जीवाड़े के सहारे वर्तमान में इसी जमीन की एक और रसीद अकबर अली के नाम से निर्गत कर दी गई है। एक ही भूखंड पर दो अलग-अलग नामों से रसीद जारी होने के कारण विवाद चरम पर पहुंच गया।

*​तनाव के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई*

​विवादित जमीन पर तीन दिन पूर्व ही अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा धारा 144 लागू कर किसी भी प्रकार के कार्य पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद, शनिवार को अकबर अंसारी के वंशजों ने उक्त जमीन पर जबरन निर्माण कार्य शुरू कर दिया। जब दूसरे पक्ष के रंजीत राम और उनके परिजन निर्माण कार्य का विरोध करने और इसे रुकवाने पहुंचे, तो दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और कहासुनी शुरू हो गई।
​मामले की गंभीरता और तनाव बढ़ने की सूचना मिलते ही गांडेय थाना प्रभारी आनंद प्रकाश सिंह दलबल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करते हुए एसडीओ के आदेश का हवाला देकर निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया और दोनों पक्षों को शांत कराया।

*​गांडेय में भू-माफिया और फर्जीवाड़े का खेल नया नहीं*

​स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांडेय अंचल में एक ही जमीन पर दोहरी जमाबंदी कायम करने और फर्जी कागजात के सहारे रसीद काटने का यह कोई पहला मामला नहीं है। सरकारी तंत्र की लापरवाही या मिलीभगत के कारण ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ रही है। फिलहाल पुलिस प्रशासन मामले पर नजर बनाए हुए है और दोनों पक्षों को कागजी दस्तावेजों के साथ सक्षम न्यायालय की शरण में जाने को कहा गया है।