रफ्तार मीडिया/गिरिडीह: भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच महेशलुण्डी और आसपास के क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत हो गई है। स्थिति इतनी विकराल हो चुकी है कि पूरा इलाका पानी के लिए त्राहिमाम कर रहा है। बदडीहा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का मोटर पिछले पांच दिनों से पूरी तरह खराब पड़ा है। इसके साथ ही सीसीएल की वाटर सप्लाई भी पिछले बीस दिनों से बंद है। इस दोहरी मार के कारण महेशलुण्डी, करहरबारी और अकदोनी कला जैसी तीन पंचायतों की लगभग पंद्रह हजार की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है और इस भीषण गर्मी में इधर-उधर भटकने को मजबूर है।
*जलस्तर गिरने से बोरिंग और कुएं भी हुए फेल*
इस संकट की घड़ी में प्राकृतिक जल स्रोतों ने भी जनता का साथ छोड़ दिया है। लगातार बढ़ती गर्मी के कारण क्षेत्र के चापानलों और कुओं का जलस्तर काफी नीचे चला गया है। आलम यह है कि जिन घरों में निजी बोरिंग या कुएं की व्यवस्था थी, वे भी अब पूरी तरह सूख चुके हैं। इसके कारण संपन्न परिवारों के सामने भी पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
*सीसीएल के मैकेनिकों की कार्यशैली पर उठे सवाल*
ग्रामीणों का कहना है कि सीसीएल प्रबंधन द्वारा इस बीच मोटर पंप को दो बार बनवाया गया, लेकिन मरम्मत के चौबीस घंटे के भीतर ही मोटर दोबारा खराब हो गई। इस घटना ने सीसीएल के मैकेनिकों की कुशलता और मरम्मत की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीसीएल की इस लापरवाही के कारण पपरवाटांड के लोग पिछले बीस दिनों से पानी के संकट से जूझ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस पंचायत की जनता आज पानी के लिए तड़प रही है, उसी पंचायत के क्षेत्र में गिरिडीह का समाहरणालय भी अवस्थित है, जहां जिले के बड़े अधिकारी बैठते हैं।
*जर्जर हो चुका है ग्यारह वर्ष पुराना प्लांट*
इस पूरे मामले पर महेशलुण्डी पंचायत के मुखिया शिवनाथ साव ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि बदडीहा ग्रामीण पेजल आपूर्ति परियोजना को स्थापित हुए अब ग्यारह वर्ष बीत चुके हैं। लंबे समय से उचित रखरखाव न होने के कारण प्लांट के सारे कल-पुर्जे सड़ चुके हैं। मुखिया के अनुसार, बहुत प्रयासों के बाद किसी तरह इस जर्जर प्लांट को चलाया जा रहा था, लेकिन अब यह बिल्कुल भी चलने की स्थिति में नहीं रह गया है। पंचायत के कुछ क्षेत्र में गिरिडीह सीसीएल के द्वारा जलापूर्ति की जाती थी परंतु वहां भी मोटर जल हुआ है साधारण बोरिंग में भी जलस्तर नीचे चला गया है मुखिया ने आक्रोश जताते हुए कहा कि मोटर पंप जलने से पिछले पांच दिनों से पूरे पंचायत में जलसंकट गहराता जा रहा है लोग परेशान हैं। इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को सारी बातों से अवगत कराया जा चुका है, परंतु इसके बावजूद समय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
इसके साथ ही उन्होंने एक और बड़ी प्रशासनिक चूक को उजागर करते हुए कहा कि महेशलुण्डी पंचायत के लिए सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इसे जल जीवन मिशन योजना में शामिल ही नहीं किया गया। केंद्र और राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से वंचित रहने के कारण इस क्षेत्र में पानी की समस्या भविष्य के लिए और भी ज्यादा गंभीर हो गई है। स्थानीय जनता ने अब जिला प्रशासन से अविलंब वैकल्पिक व्यवस्था करने और वाटर प्लांट को नए सिरे से दुरुस्त करने की मांग की है।