सोनाहातु: झारखंड-बंगाल सीमा पर स्थित सोनाहातु के बारेंदा-मारांगकिरी के उच्चस्तरीय बन कर तैयार हो जाने के साथ ही पुल पर आवागमन शुरू हो गया है।पुल पर आवाजाही शुरू होने के साथ ही एक नई समस्या सामने आई है।स्थानीय लोगों के अनुसार रात के समय असामाजिक तत्वों का बढ़ती आवाजाही पर भय का माहौल बन रहा है।इस तरह माहौल बनने से ग्रामीणों में काफी चिंता सता रही है।असमाजिक तत्वों से लोग निजात पाने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन से पुल पर सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।सोनाहातु प्रखंड को पश्चिम बंगाल से सीधे जोड़ने वाला बारेंदा-मारांगकिरी उच्च स्तरीय पुल हाल ही में जनता के लिए खोल दिया गया है। इस पुल से जहां दो राज्यों के बीच दूरी कम हुई है, वहीं सीमावर्ती गांवों के लोगों ने सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुल चालू होने के बाद से रात के अंधेरे में संदिग्ध वाहनों और अज्ञात लोगों का आना-जाना तेज हो गया है। लोगों को आशंका है कि बॉर्डर इलाका होने के कारण इसका फायदा असामाजिक तत्व उठा सकते हैं।इसके पूर्व भी बॉडर पर कई प्रकार के कांड हो चुका है।श्चिम बंगाल में चल रहे चुनावी माहौल को देखते हुए भी ग्रामीण अतिरिक्त सतर्कता बरतने की मांग कर रहे हैं।स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस प्रशासन से दरखास्त की है कि बारेंदा-मारांगकिरी पुल पर शीघ्र स्थायी पुलिस पिकेट या दंडाधिकारी की तैनाती की जाए।उनका कहना है कि रात में नियमित चेकिंग से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाया जा सकता है। स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि दिन में तो ठीक है, लेकिन ज्यों- ज्यों शाम से रात ढलने के बाद क्षेत्र में भय का माहौल बन जाता है।तेज रफ्तार बाइक और चारपहिया बाहन निकलती हैं।पता नहीं कौन लोग होते हैं।उच्चस्तरीय पुल के आसपास एक-दो पुलिस वाले हमेशा रहने की जरूरत है।बारेंदा-मारांगकिरी पुल विकास के लिए जरूरी है।लेकिन इसके साथ ही क्षेत्र के लोगों कखा सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही अहम है।अब ग्रामीणों को प्रशासन के अगले कदम का इंतजार है, इसलिए कि क्षेत्र के ग्रामीणों में शांति का माहौल बना रहे।