सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिले में बालू के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के सरकारी दावों की पोल खोलता एक वीडियो सामने आया है। कांड्रा-चौका मुख्य मार्ग पर मालवाहक वाहनों की संरचना में बदलाव कर ओवरलोड बालू की ढुलाई किए जाने का मामला उजागर हुआ है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि निर्धारित क्षमता से अधिक बालू लादकर वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की रोक के बावजूद इस मार्ग पर लगातार बालू का परिवहन किया जा रहा है। आरोप है कि बालू तस्करों ने वाहनों के डाले (बॉडी) को ऊंचा कर उनकी क्षमता बढ़ा दी है, जिससे निर्धारित सीएफटी से कहीं अधिक बालू की ढुलाई की जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर आम लोगों को घर निर्माण के लिए बालू उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, वहीं दूसरी ओर बड़े-बड़े बिल्डरों, मिक्सर प्लांटों और निर्माण स्थलों तक प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बालू पहुंच रही है। इससे प्रशासनिक निगरानी और खनन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।लोगों का आरोप है कि अवैध बालू परिवहन को लेकर लगातार शिकायतें और समाचार प्रकाशित होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे बालू तस्करों के हौसले बुलंद हैं और अवैध कारोबार बेरोकटोक जारी है।इस पूरे मामले के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। यदि एनजीटी की रोक प्रभावी है तो आखिर इतनी बड़ी मात्रा में बालू कहां से आ रही है? इन वाहनों के पास किस आधार पर परिवहन की अनुमति है? क्या निर्धारित मात्रा का ही चालान जारी किया जा रहा है या फिर ओवरलोडिंग पर विभाग आंखें मूंदे हुए है? सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस अवैध कारोबार की निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध बालू परिवहन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इससे राजस्व की क्षति के साथ-साथ सड़क सुरक्षा और पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।