दिनेश कुमार रजक/रफ्तार मीडिया संवाददाता/मिहिजाम

जामताड़ा जिला के मिहिजाम आमबागान स्थित एकमात्र कामाख्या मंदिर में 26 जून को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। एक दिवसीय भव्य पूजा अनुष्ठान में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और पूरा क्षेत्र जय मां कामाख्या के जयकारों से गूंज उठा। अनुष्ठान की शुरुआत 25 जून की शाम भजन-कीर्तन कार्यक्रम से हुई। देर रात तक चले भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। 26 जून को सुबह पट खुलते ही महिलाओं ने विशेष उत्साह दिखाया। सबसे पहले मंदिर की साफ-सफाई की गई। इसके बाद मां कामाख्या को विधि-विधान से नहलाकर दुग्ध अभिषेक, शहद अभिषेक और पंचामृत से स्नान कराया गया। अभिषेक के बाद माता का भव्य श्रृंगार किया गया। लाल चुनरी, फूल-मालाओं और आभूषणों से सजी मां की छवि देखते ही बन रही थी। सुबह करीब 9 बजे मंदिर प्रांगण से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सिर पर कलश लिए सैकड़ों महिलाएं मंगल गीत गाते हुए चलीं। यह यात्रा मिहिजाम के मुख्य चौक-चौराहों, बाजार और प्रमुख मोहल्लों से होकर गुजरी। रास्ते भर स्थानीय लोगों ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया। यात्रा पुनः मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। दोपहर में महाभोग का वितरण किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। भजन मंडली ने एक से बढ़कर एक देवी गीत प्रस्तुत किए। वहीं स्कूली बच्चों द्वारा मां की महिमा पर आधारित आकर्षक नृत्य नाटिका पेश की गई, जिसने सभी का मन मोह लिया। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि मिहिजाम में यह एकमात्र कामाख्या मंदिर है, जहां हर साल अंबुबाची के अवसर पर विशेष पूजा होती है। कार्यक्रम को सफल बनाने में महिला मंडल, युवा समिति और स्थानीय लोगों का विशेष योगदान रहा। देर रात महाआरती के साथ एक दिवसीय अनुष्ठान का समापन हुआ।