सरायकेला: सरायकेला का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथ मेला इन दिनों आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का भव्य संगम बना हुआ है। प्रतिदिन सरायकेला सहित पूरे कोल्हान क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के दर्शन और मेले का आनंद लेने के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से पूरा मेला परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर है।विश्व की अद्भुत और प्राचीन परंपरा के अनुसार महाप्रभु श्री जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा प्रतिदिन अलग-अलग दिव्य वेश धारण कर श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं। यही अनूठी परंपरा इस रथ मेले की सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है। सोमवार को भगवान ने राम-बलराम स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए थे, जबकि मंगलवार और बुधवार को महाप्रभु कल्कि अवतार के दिव्य वेश में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।मेला परिसर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आकर्षण भी लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं। यहां स्थापित लगभग 17 फीट ऊंची भगवान विष्णु की विराट प्रतिमा, समुद्र मंथन की जीवंत झांकी तथा अनंत शय्या पर विराजमान भगवान विष्णु की मनमोहक झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई हैं। बड़ी संख्या में लोग इन दिव्य झांकियों के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और उनकी भव्यता की सराहना कर रहे हैं।शाम होते ही मेला परिसर रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठता है। झूले, मनोरंजन के विभिन्न साधन, हस्तशिल्प एवं घरेलू सामानों की दुकानें, स्थानीय व्यंजन और धार्मिक वातावरण मेले की रौनक को और बढ़ा रहे हैं।प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालु शांतिपूर्ण माहौल में दर्शन और मेले का आनंद ले रहे हैं।करीब साढ़े तीन सौ वर्षों से अधिक पुरानी परंपरा को संजोए सरायकेला का ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ रथ मेला आज भी अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरिमा के कारण देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।