फतह सिंह उजाला 
गुरुग्राम 24 जून । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक बुवानीवाला ने कहा कि हरियाणा में वृद्धावस्था सम्मान पेंशन योजना के लाभार्थियों को पेंशन लेेने के लिए उम्र का प्रमाण पत्र अनिवार्य करके सरकार ने परेशानी खड़ी कर दी है। जिस समय में आज के बुजुर्ग जन्में थे, उस समय उम्र का कोई खास प्रमाण नहीं रखा जाता था। अगर कोई बुजुर्ग प्रमाण नहीं दे पाता है तो क्या उसकी उम्र कम हो जाएगी। सरकार को इस नियम को वापस लेकर बीच का रास्ता निकालना चाहिए।

अशोक बुवानीवाला ने कहा कि उम्र का प्रमाण अनिवार्य किए जाने के बाद हजारों बुजुर्गों के सामने दस्तावेज जुटाने का संकट खड़ा हो गया है। बड़ी संख्या में ऐसे बुजुर्ग हैं जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल छोडऩे का प्रमाण पत्र या अन्य दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में उनकी पेंशन रुकने या सत्यापन में अटकने का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि आज के बुजुर्गों के जन्म के समय में जन्म का रजिस्ट्रेशन आम नहीं था। घर में ही दाई की मदद से प्रसव होता था और बहुत से तो स्कूल भी नहीं गए। इसलिए उनके पास कोई कागजी प्रमाण नहीं है। अब जब विभाग उम्र का प्रमाण मांग रहा है तो वे असहाय महसूस कर रहे हैं। कई बुजुर्ग बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल पा रहा। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के पास प्रमाण पत्र के लिए एसएमएस भी आ रहे हैं। इससे उनकी परेशानी और अधिक बढ़ रही है। वे तनाव की स्थिति में हैं।  


सरकार ने बुजुर्गों के लिए एक नया संकट खड़ा किया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक बुवानीवाला ने कहा कि सरकार ने बुजुर्गों के लिए एक नया संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि जिन बुजुर्गों ने जीवन भर मेहनत कर प्रदेश के विकास में योगदान दिया, आज उन्हें पेंशन के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। सरकार को मानवीय आधार पर इस समस्या का तुरंत समाधान निकालना चाहिए। बुवानीवाला ने मांग की कि जिन बुजुर्गों के पास दस्तावेज नहीं हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि पंचायत या नगर निकाय के सत्यापन, स्थानीय गवाहों के बयान और आधार में दर्ज आयु को आधार मानकर पेंशन जारी रखी जाए। उनका कहना है कि तकनीकी औपचारिकताओं के चक्कर में पात्र बुजुर्गों को पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।  

आधार में दर्ज आयु को भी एक वैध आधार मानें

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक बुवानीवाला ने कहा कि हरियाणा सरकार ने उम्र प्रमाण को पेंशन योजना में पारदर्शिता और फर्जी लाभार्थियों को रोकने के लिए उम्र का प्रमाण अनिवार्य करके बुजुर्गों का अपमान भी किया है। हकीकत यह है कि 60 से 80 साल के बीच के अधिकांश बुजुर्गों के पास ऐसे दस्तावेज नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और गंभीर है। कई बुजुर्ग अशिक्षित हैं और सरकारी प्रक्रिया को समझ नहीं पा रहे। इसके चलते उनकी पेंशन अटक गई है और घर चलाने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का कहना है कि उम्र का अंदाजा उनके चेहरे और शारीरिक स्थिति से लगाया जा सकता है। ऐसे में कागज की अनिवार्यता उनके लिए बाधा बन गई है। सरकार को शहरी क्षेत्र में पार्षदों व ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों के माध्यम से उम्र का सत्यापन कराकर अस्थायी पेंशन जारी रखनी चाहिए। साथ ही उन बुजुर्गों के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं। आधार में दर्ज आयु को भी एक वैध आधार माना जा सकता है।