फतह सिंह उजाला
पटौदी। नवाबी नगरी पटौदी में मोहर्रम के अवसर पर मातमी धुन के साथ पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। शहर में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार निकाले गए इस जुलूस में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धापूर्वक याद किया। जानकारी के अनुसार पटौदी में नवाबी रियासत के समय से ही मोहर्रम पर ताजिया जुलूस निकालने की परंपरा चली आ रही है। जुलूस के दौरान पटेबाजी और तलवारबाजी के करतब भी प्रस्तुत किए गए, जिन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही।
ताजिया जुलूस पुराना किला से शुरू होकर छोटी बाजारी, नोहटा चौक, जामा मस्जिद चौक और व्यापारी मोहल्ला होते हुए कर्बला मैदान पहुंचा, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजिया सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। जुलूस मार्ग में विभिन्न स्थानों पर मीठे पानी की छबील लगाई गई। वहीं कालू जागीरदार की ओर से इमाम हुसैन के नाम पर लंगर आयोजित किया गया। इसके अलावा एजाज हुसैन उर्फ जज्जू बाबा द्वारा श्रद्धालुओं को देशी घी का हलवा प्रसाद वितरित किया गया।
एजाज हुसैन ने बताया कि मोहर्रम का सबसे महत्वपूर्ण दिन दस मोहर्रम यानी आशूरा माना जाता है। यह दिन इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है। वर्ष 680 ईस्वी में कर्बला के युद्ध में इमाम हुसैन ने अन्याय के खिलाफ खड़े होकर अपने सिद्धांतों और इंसाफ के लिए बलिदान दिया था। इसी कारण विशेष रूप से शिया समुदाय मोहर्रम को शोक और श्रद्धांजलि के रूप में मनाता है। इस मौके पर जोगिंदर यादव, मनी गोड़, डॉ उमेश शर्मा, मंजीत सैनी, सत्तार पठान, मोहब्बत अली, समद हुसैन, रजाहुसैन, अब्दुल मजीद, आसिफ अली तस्लीम अहमद, अलमदार सैय्यद मेहराज हुसैन, अलमदार सैय्यद सादक अली, लमदार आबिद अली अल्ताफ हुसैन सहित काफी संख्या में महिला पुरुष मौजूद रहे।