रफ्तार मीडिया, कुमार विक्रम दुमका
दुमका जिला के मसलिया प्रखंड के दलाही पंचायत अंतर्गत लखिबाद के एक दिहाड़ी मजदूर का परिवार इन दिनों बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। मजदूर निर्मल महतो का इकलौता 8 वर्षीय पुत्र जीत यादव ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी की चपेट में है। बेटे की जीवन रक्षा के लिए अब यह असहाय पिता किसी मसीहा या रहनुमा के इंतजार में दर-दर भटकने को मजबूर है।मामले की शुरुआत 22 मई को हुई, जब जीत को अचानक तेज पेट दर्द और उल्टियां होने लगीं। घबराए परिजनों ने उसे तुरंत पश्चिम बंगाल के आसनसोल स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया। कुछ दिनों के उपचार के बाद बच्चे की हालत में सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 24 जून को जीत की तबीयत पुन बिगड़ गई। स्थानीय डॉक्टरों की सलाह पर परिजन उसे हवाई मार्ग से तमिलनाडु के वेल्लोर ले गए, जहाँ वर्तमान में उसका इलाज चल रहा है। वेल्लोर के विशेषज्ञों ने जांच के बाद ब्रेन ट्यूमर की पुष्टि करते हुए तत्काल ऑपरेशन की सलाह दी है।डॉक्टरों ने इलाज पर 5 लाख रुपये से अधिक का खर्च बताया है। एक दिहाड़ी मजदूर के लिए इतनी बड़ी धनराशि जुटाना असंभव के समान है। निर्मल महतो ने भावुक होकर बताया, मैं रोज मजदूरी करता हूं, तब जाकर घर का चूल्हा जलता है। मेरा इकलौता बेटा मौत के मुहाने पर खड़ा है और मैं उसके इलाज के लिए दर-दर भटक रहा हूं।उन्होंने बताया कि वे मदद की आस में कई राजनीतिक दलों, नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के पास गए, लेकिन हर बार उन्हें केवल झूठे आश्वासन मिले। आर्थिक मदद के नाम पर उन्हें अब तक निराशा ही हाथ लगी है।इस मामले पर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुनील कुमार सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से ऐसे मरीजों के लिए मुख्यमंत्री गंभीर बीमारी योजना के तहत मदद का प्रावधान है। उन्होंने परिजनों को परामर्श दिया कि वे अस्पताल से उपचार का संभावित खर्च और आवश्यक दस्तावेज तैयार कर विभाग से संपर्क करें, ताकि सरकारी स्तर पर सहायता प्रक्रिया शुरू की जा सके।फिलहाल, नन्हा जीत वेल्लोर के अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच कड़ा संघर्ष कर रहा है। परिवार की उम्मीदें अब समाज के संवेदनशील नागरिकों और प्रशासन पर टिकी हैं।