राजु मंडल रफ्तार मीडिया सवाददाता गांडेय।

​गांडेय: एक तरफ देश डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ गांडेय प्रखंड के पंदना गाँव के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गाँव में शुद्ध पेयजल का घोर अभाव है, जिसके कारण ग्रामीण खुले खेत में स्थित एक डाड़ी (प्राकृतिक जल स्रोत) का दूषित पानी पीने को विवश हैं।

*​पशुओं के साथ एक ही स्रोत से पानी पीने को मजबूर ग्रामीण*

​पंदना निवासी छोटेलाल मांझी ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि गाँव में पेयजल का कोई ठोस प्रबंध नहीं है। ग्रामीण अपने घरों से करीब आधा किलोमीटर दूर खेत में स्थित एक खुली डाड़ी से पानी लाने को मजबूर हैं। चिंताजनक बात यह है कि उसी डाड़ी से गाँव के पालतू और आवारा पशु भी पानी पीते हैं, जिससे पानी के दूषित होने और ग्रामीणों में बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है।गाँव में एक भी चापाकल ठीक स्थिति में नहीं है, जो प्रशासन की अनदेखी को दर्शाता है।

*​राज्य गठन के वर्षों बाद भी सुविधाओं का टोटा*

​झारखंड राज्य बने ढाई दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पंदना जैसे गाँव के लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएँ आज भी एक सपना बनी हुई हैं। शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के अभाव में ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है।

पंदना के ग्रामीणों के साथ स्थानीय पंडरी पंचायत के मुखिया केसर मुर्मू ने बताया की स्थानीय प्रशासन से तत्काल गाँव में चापाकल की व्यवस्था करने और पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है ताकि उन्हें दूषित पानी पीने से मुक्ति मिल सके।