दीपचंद्र दीक्षित संवाददाता 

फर्रुखाबाद। शमशाबाद कस्बे में मोहर्रम पर शिया समुदाय ने पूरे अकीदत और गमगीन माहौल के बीच ताजियों का जुलूस निकाला। सुबह बड़े इमामबाड़े सहित विभिन्न स्थानों से शुरू हुआ जुलूस मुख्य मार्गों से होता हुआ कर्बला पहुंचा। अकीदतमंद हाथों में अलम और ताबूत लिए “या हुसैन, या हुसैन” की सदाओं के बीच नौहाख्वानी और मातम करते हुए आगे बढ़े। नौहाख्वानों की सोजभरी आवाजों से पूरा वातावरण गमगीन हो गया। कर्बला पहुंचने पर मजलिस का आयोजन किया गया, जिसमें मौलानाओं ने इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करते हुए उनके त्याग, बलिदान और अन्याय के खिलाफ संघर्ष के संदेश पर प्रकाश डाला। मजलिस के बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार अलम, ताबूत और ताजियों को सादगीपूर्ण माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

इस अवसर पर पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष एवं वर्तमान चेयरपर्सन पति नदीम अहमद फारूकी ने कहा कि मोहर्रम का महीना त्याग, बलिदान, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देता है तथा इमाम हुसैन की कुर्बानी सदैव सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी। जुलूस के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल और स्वयंसेवक पूरी तरह मुस्तैद रहे तथा मुख्य मार्गों पर बैरिकेडिंग कर शांतिपूर्ण ढंग से आयोजन संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में नवाब गजमफर अब्बास, नवाब वजीर अली, जफर अली, अथर अली, सैयद असलम अली जैदी, रिजवान हुसैन, अफसर हुसैन, अंसार हुसैन, अनीस नैयर, चांद सलमान, पप्पू, कासिम हुसैन सहित बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग मौजूद रहे। वहीं सरताज खान, अभय सक्सेना, अशोक शर्मा, आमिल खान, कासिम मंसूरी, इमरान समेत विभिन्न वर्गों के लोगों ने भी आयोजन में शामिल होकर गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द का परिचय दिया।