कुमार विक्रम, रफ़्तार मीडिया /दुमका : जिला में रफ़्तार मीडिया की खबर और प्रखंड विकास पदाधिकारी अजफर हसनैन की अनुशंसा के बाद, दलाही लैम्पस में धान खरीद प्रक्रिया की जांच प्रशासन ने तेज कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला सहकारिता पदाधिकारी कर्मवीर मेहता ने खुद लैम्पस पहुंचकर धान क्रय से जुड़े रजिस्टरों को खंगाला और किसानों से बात की।उन्होंने बताया कि गहन जांच अभी जारी है और जल्द ही इसकी अंतिम रिपोर्ट आ जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच निष्पक्ष होगी और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।एक तरफ जहां बीडीओ के औचक निरीक्षण में सहायक प्रबंधक के परिवार और कई अन्य रसूखदार घरों के तीन-चार सदस्यों के नाम पर सैकड़ों क्विंटल धान की खरीद दिखाए जाने पर सवाल उठे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ स्थानीय किसानों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।किसानों का कहना है कि उन्होंने वास्तव में केंद्र पर धान की बिक्री की है। उनके मुताबिक, जिन परिवारों में तीन-चार रजिस्ट्रेशन हैं, उनके पास पर्याप्त कृषि भूमि उपलब्ध है और उसी के आधार पर उपज हुई है। किसानों ने तर्क दिया कि धान बेचने से पहले अंचल कार्यालय स्तर से जमीन का पूरा सत्यापन किया जाता है। ऐसे में सीधे तौर पर किसानों को दोषी ठहराना सही नहीं है। किसानों का यह भी कहना है कि अगर व्यवस्था में कहीं कोई गड़बड़ी या गलत एंट्री हुई है, तो इसमें निश्चित रूप से विभागीय मिलीभगत की आशंका है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।फिलहाल, इस प्रशासनिक हलचल और मीडिया की सजगता के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब सबकी नजरें जिला सहकारिता विभाग की आने वाली अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे साफ़ होगा कि यह महज एक भ्रम है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था।