राजु मंडल /रफ्तार मीडिया सवाददाता /गांडेय
गांडेय थाना क्षेत्र के सोनाजोरी गांव में आपसी सौहार्द और समझदारी की एक बेहतरीन मिसाल देखने को मिली है। यहां लगभग 15 वर्षों से चले आ रहे दो सगे भाइयों के बीच के विवाद को आखिरकार ग्रामीण पंचायत की पहल से हमेशा के लिए सुलझा लिया गया। सोनाजोरी गांव निवासी चुरामन पंडित के पुत्र भीम पंडित और राजेश पंडित के बीच पिछले डेढ़ दशक से विभिन्न पारिवारिक मामलों को लेकर अनबन चली आ रही थी।
*कई बार हो चुकी थी मारपीट, मामला पहुंचा था कोर्ट*
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोनों भाइयों के बीच का विवाद समय के साथ इस कदर बढ़ गया था कि दोनों पक्षों के बीच कई बार आपस में मारपीट की नौबत आ गई थी। इस मामले को सुलझाने के लिए पूर्व में भी कई बार स्थानीय स्तर पर पंचायतें बैठाई गई थीं, लेकिन कोई ठोस और संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया था। स्थिति यहाँ तक बिगड़ गई थी कि दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ थाने में मामले दर्ज कराए गए और बात कोर्ट-कचहरी तक पहुँच गई थी। अदालत से भी कोई संतोषजनक फैसला नहीं मिलने के कारण दोनों परिवारों के बीच दूरियां और अधिक बढ़ती चली गईं।
*गणमान्य लोगों की पहल पर बैठी पंचायत*
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के कुछ गणमान्य लोगों और प्रबुद्ध नागरिकों ने पुनः पहल की। उन्होंने दोनों भाइयों को बैठाकर आपसी मतभेदों को भुलाने और भाई-चारे की मिसाल कायम करने के लिए प्रेरित किया। समझाने का यह दौर रंग लाया और दोनों पक्ष पंचायत के माध्यम से मामले को सुलझाने के लिए राजी हो गए।
सोनाजोरी गांव में दोनों भाइयों के घर के समीप एक स्थानीय पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वसम्मति से एक निष्पक्ष फैसला लिया गया, जिसे दोनों भाइयों ने खुले मन से स्वीकार किया। पंचायत के इस सकारात्मक निर्णय से दोनों भाइयों के बीच वर्षों पुरानी कड़वाहट खत्म हो गई और वे राजी-खुशी गले मिलकर एक हो गए।
इस पहल से न केवल एक ही परिवार के दो हिस्से फिर से एक हो गए, बल्कि क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बन गया है कि आपसी बातचीत और पंचायत के जरिए बड़े से बड़े और कोर्ट में लंबित मामलों को भी आसानी से सुलझाया जा सकता है। इस फैसले से दोनों परिवारों के सदस्यों और ग्रामीणों में काफी खुशी का माहौल है।
पंचायत में स्थानीय मुखिया अब्दुल हफीज भाजपा नेता जयमंगल राय, डोकीडीह पंचायत के मुखिया नूर मोहम्मद,प्रमोद राय, समसुल अंसारी, अलाउद्दीन अंसारी,समेत कई गणमान्य पंचों ने किया फैसला।