दीपचंद्र दीक्षित ब्यूरो
फर्रुखाबाद। केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर 'विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन' कर दिया है। सरकार का उद्देश्य इस योजना में पारदर्शिता बढ़ाना, फर्जीवाड़े पर रोक लगाना और तकनीक के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एनएमएमएस (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप के जरिए फोटो आधारित हाजिरी की व्यवस्था लागू की गई। लेकिन विकासखंड कमालगंज से सामने आया मामला इन सभी दावों पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है।
मंगलवार रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद क्षेत्र के खेत, मेड़ और कच्चे रास्ते जलमग्न हो गए। कई स्थानों पर पानी भर जाने से मजदूरों के लिए कार्य करना लगभग असंभव था। इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में बड़ी संख्या में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर ली गई। आरोप है कि मौके पर काम नहीं हुआ, लेकिन कागजों पर कार्य और मजदूरों की हाजिरी नियमित रूप से दर्ज होती रही।
उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार ग्राम झिझुकी में 40, कुंदन गणेशपुर में 32 तथा ताजपुर में 27 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई। स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि इन स्थानों पर न तो कार्य चल रहा था और न ही इतनी संख्या में मजदूर मौजूद थे। विकासखंड के अन्य गांवों से भी इसी प्रकार की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है।
मामले ने सबसे बड़ा सवाल एनएमएमएस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर खड़ा कर दिया है। जब प्रत्येक मजदूर की उपस्थिति फोटो, समय और लोकेशन के साथ दर्ज की जाती है, तब बारिश के दौरान कथित रूप से फर्जी हाजिरी कैसे दर्ज हो गई? यदि बिना वास्तविक कार्य के उपस्थिति दर्ज हुई है तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का नाम बदलने से व्यवस्था नहीं बदलती। जब तक फर्जी मस्टर रोल, कागजी मजदूरी और अनियमितता में शामिल अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पूरी पारदर्शिता के साथ नहीं पहुंच पाएगा।
इस संबंध में खंड विकास अधिकारी श्वेता कौशिक ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है और वह स्वयं इसकी निगरानी में जांच करा रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि जांच में फर्जी हाजिरी या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वहीं डीसी मनरेगा कपिल कुमार ने भी मामले की जानकारी मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने पूरे प्रकरण की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
बारिश से जलमग्न खेतों के बीच कागजों पर चलता कथित काम और तकनीकी निगरानी के बावजूद फर्जी हाजिरी के आरोपों ने एक बार फिर ग्रामीण रोजगार योजनाओं की पारदर्शिता, निगरानी व्यवस्था और सरकारी धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।