सरायकेला: सरायकेला खरसावां जिले के कांड्रा की मध्य बस्ती में श्री श्री सार्वजनिक चड़क शिव पूजा कमेटी द्वारा पारंपरिक चड़क पूजा का भव्य आयोजन किया गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी यह अनुष्ठान श्रद्धा, साहस और परंपरा के अनोखे संगम के रूप में सामने आया, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।चड़क पूजा के दौरान भोक्ता अपने पीठ की त्वचा में कील चुभाकर उसमें रस्सी बांधते हैं और ऊंचे लकड़ी के खंभे से झूलते हुए परिक्रमा करते हैं। हवा में लटककर किया जाने वाला यह अनुष्ठान अत्यंत हैरतअंगेज दृश्य प्रस्तुत करता है। इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए दूर-दराज से लोग कांड्रा पहुंचे।श्रद्धालुओं का मानना है कि यह अनुष्ठान भगवान शिव की आराधना का विशेष माध्यम है। “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच पूरे क्षेत्र में भक्ति का माहौल बना रहा।उपस्थित लोगों ने बताया कि भोलेनाथ का नाम लेने से पीड़ा का अहसास कम हो जाता है और घाव शीघ्र भर जाते हैं।पूजा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय लोगों की आस्था इससे गहराई से जुड़ी है। कांड्रा की यह चड़क पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपरा का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।