बिद्युत महतो / रफ्तार मीडिया संवाददाता, ईचागढ़
झारखंड आंदोलन के महानायक, दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने पर पूरे झारखंड समेत देशभर के आदिवासी-मूलवासी समाज में खुशी और गौरव का माहौल है। इसे झारखंड की पहचान, संघर्ष और अस्मिता को मिला राष्ट्रीय सम्मान माना जा रहा है।
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय भवन में आयोजित सम्मान समारोह में यह सम्मान उनकी धर्मपत्नी रूपी सोरेन ने ग्रहण किया। इस अवसर को झारखंड आंदोलन के इतिहास में एक भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण के रूप में देखा जा रहा है।
इस सम्मान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पद्म भूषण सम्मान उनके दशकों लंबे संघर्ष, त्याग और जनसेवा को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और आदिवासी समाज के आत्मसम्मान, संस्कृति और ऐतिहासिक संघर्ष का सम्मान है। इससे नई पीढ़ी को अपनी पहचान, परंपराओं और अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रेरणा मिलेगी।
सुकलाल पहाड़िया ने भारत सरकार और राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र ने झारखंड आंदोलन के इस महान सपूत के योगदान को सम्मान देकर एक ऐतिहासिक कार्य किया है। इस उपलब्धि पर राज्य के विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसंगठनों ने भी खुशी जाहिर की है।