मोतिहारी/पताही।तिवारी
पताही प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चर्चा में है। अस्पताल से महज कुछ ही दूरी पर रहने वाले बैजू मिस्त्री की कथित रूप से समय पर उपचार नहीं मिलने के बाद हुई मृत्यु से स्थानीय लोगों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय पर समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होती तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी।
घटना की सूचना मिलने के बाद अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी गुलफान आलम ने अस्पताल पहुंचकर स्वास्थ्य व्यवस्था का निरीक्षण किया। स्थानीय लोगों के अनुसार जांच के दौरान अस्पताल की रात्रिकालीन व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं में कई गंभीर कमियां सामने आईं।
ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण के समय इमरजेंसी वार्ड बंद मिला। अस्पताल परिसर में आवाज देने के बावजूद कोई स्वास्थ्यकर्मी तत्काल नहीं पहुंचा और कुछ देर बाद मुख्य गेट खोला। मौके पर केवल दंत चिकित्सक की उपस्थिति बताई गई, जबकि अन्य चिकित्सक मौजूद नहीं मिले। निरीक्षण के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर, दवाओं की उपलब्धता तथा ऑपरेशन थिएटर की स्थिति की भी जांच की गई। आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी।
निरीक्षण के दौरान अनुमंडल कल्याण पदाधिकारी ने उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को फटकार लगाते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली में सुधार लाने तथा सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
इधर ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की कार्यशैली को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका आरोप है कि शिकायतें प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक पहुंचती हैं, फिर भी कार्रवाई का असर धरातल पर दिखाई नहीं देता।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शंकर बैठा ने क्या कहा
इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शंकर बैठा ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर समय पर भरवाना संबंधित कर्मियों की जिम्मेदारी है और यदि इस कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो वह बर्दाश्त करने योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. बैठा ने यह भी कहा कि अस्पताल में कुछ कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय से पदस्थापित हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और कार्य संचालन में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं। इस संबंध में उन्होंने जिला स्तर पर लिखित रूप से आवेदन भेजा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
उन्होंने बताया कि पदभार ग्रहण करने के बाद से उनका लगातार प्रयास रहा है कि ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। बैजू मिस्त्री की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मृतक पहले से हृदय रोग से पीड़ित थे और उनका इलाज भी अस्पताल में किया गया था। उन्होंने कहा कि हृदय रोग के मरीज की स्थिति कभी भी अचानक गंभीर हो सकती है, इसलिए हर मामले में मृत्यु का कारण केवल अस्पताल व्यवस्था को नहीं माना जा सकता। हालांकि यदि किसी स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही सामने आती है तो विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य पूरी निष्ठा और तत्परता के साथ अस्पताल की सेवाओं को बेहतर बनाना है। विभागीय जांच की जो भी रिपोर्ट आएगी, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले में लोगों की नजर जिला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी मरीज को समय पर इलाज के अभाव में जान न गंवानी पड़े।
(नोट: इस खबर में वर्णित आरोप स्थानीय ग्रामीणों के दावों पर आधारित हैं। समाचार में अस्पताल प्रशासन का पक्ष भी शामिल किया गया है। मामले की आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि नए तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)