मोतिहारी।ओम प्रकाश तिवारी 
पूर्वी चंपारण में नए सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार के पदभार ग्रहण करने की तैयारी के बीच जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें बढ़ गई हैं। वहीं, पिछले कुछ महीनों से चर्चा में रहे कई मामलों की जांच और उन पर संभावित कार्रवाई को लेकर आम लोगों की निगाहें स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हुई हैं।
पताही प्रखंड में कथित रूप से सरकारी दवाइयों को नष्ट किए जाने के मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच कराई गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है और न ही किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आई है।
इसी प्रकार खुटौना स्वास्थ्य उपकेंद्र से जुड़े मामले में स्वास्थ्यकर्मी अंजली द्वारा विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध की गई शिकायत की भी जांच होने की बात कही गई थी। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जांच पूरी होने के बावजूद अब तक विभाग की ओर से अंतिम निर्णय या कार्रवाई की आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई है।
प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक शंकर बैठा द्वारा भी अपनी जांच रिपोर्ट जिला स्तर पर भेजे जाने की चर्चा है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। वहीं अस्पताल के नाम पर जन्म प्रमाण-पत्र से जुड़े संदिग्ध संदेश मिलने की शिकायतों पर भी कार्रवाई की प्रतीक्षा बनी हुई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आवेदन देने के बाद भी उन्हें मामले की प्रगति की जानकारी नहीं मिल सकी है।
हाल ही में बैजू राउत मिस्त्री की मौत के मामले ने भी स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। इस मामले में भी जांच का आश्वासन दिया गया है। लोगों का कहना है कि सभी लंबित मामलों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
रफ्तार मीडिया ने इस संबंध में नवपदस्थापित सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि वे फिलहाल चिकित्सकीय कारणों से अवकाश पर हैं। उन्होंने कहा कि पदभार ग्रहण करने के बाद संबंधित सभी मामलों की जानकारी प्राप्त कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब जिलेवासियों की नजर इस बात पर है कि नए सिविल सर्जन के कार्यभार संभालने के बाद लंबित जांचों पर क्या निर्णय लिया जाता है। फिलहाल सभी मामलों में विभागीय जांच प्रक्रिया जारी बताई जा रही है और अंतिम निष्कर्ष विभाग की आधिकारिक जांच रिपोर्ट एवं आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगा।